- झारखंड के छात्र भविष्य और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए.
- यह केवल झारखंड के छात्रों की नहीं, बल्कि देशभर के युवाओं के अधिकारों की लड़ाई है
Ranchi : जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी छात्र आंदोलन को शुक्रवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) का समर्थन मिला.
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा आंदोलन स्थल पहुंचीं, जहां उन्होंने दोनों टेंट में मौजूद छात्रों और आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों से अलग-अलग मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और आंदोलन का समर्थन किया.

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों को संबोधित करतीं नेहा बोरा
दिल्ली में सीजेपी (CJP) आंदोलन के दौरान 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर रह चुकीं नेहा बोरा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. कहा कि झारखंड के छात्र अपने भविष्य और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि यह केवल झारखंड के छात्रों की नहीं, बल्कि देशभर के युवाओं के अधिकारों की लड़ाई है. उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि AISA इस आंदोलन में उनके साथ खड़ा है और वह प्रस्तावित विधानसभा घेराव में भी शामिल होंगी.

आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि जेपीएससी का इतिहास लगातार विवादों और कथित घोटालों से जुड़ा रहा है. पहले और दूसरे जेपीएससी घोटाले के बाद अब 14वीं जेपीएससी परीक्षा पर भी गंभीर सवाल उठे हैं. उनका कहना है कि आयोग की विश्वसनीयता लगातार प्रभावित हुई है और अब व्यापक परीक्षा सुधार की जरूरत है.
छात्रों ने मांग की कि जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित जिन भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, उन सभी परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से पुनर्परीक्षा कराई जाए.
उनका कहना है कि केवल जांच से छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा, बल्कि दोषपूर्ण परीक्षाओं को निरस्त कर नई व्यवस्था के तहत दोबारा परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए. आंदोलनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में TDPL जैसी निजी एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए.

छात्रों का आरोप है कि निजी एजेंसियों के माध्यम से परीक्षा आयोजित कराने से पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होती है. उन्होंने मांग की कि भविष्य में भर्ती परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी सीधे सरकार और संबंधित आयोगों द्वारा निभाई जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार की स्थिति में स्पष्ट जवाबदेही तय हो सके.
छात्रों ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार, नए नियमों के तहत पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और स्पष्ट परीक्षा कैलेंडर लागू किया जाना चाहिए, जिससे युवाओं का भरोसा बहाल हो सके. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड में निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था स्थापित करने की लड़ाई है.
नेहा बोरा ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के संघर्ष को सलाम करते हुए देशभर, विशेषकर झारखंड के छात्रों और युवाओं से आंदोलन के समर्थन में आगे आने की अपील की. उन्होंने कहा कि युवाओं को सम्मानजनक रोजगार, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए.
आंदोलनकारी छात्रों ने भी दोहराया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन और आमरण अनशन जारी रहेगा.
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