Ranchi : झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा एक बार फिर विवादों में है. पिछले 5 दिनों में समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने की कथित लापरवाही के कारण दो लोगों की मौत हो गई. इनमें गुमला की 13 साल की एक बच्ची और जमशेदपुर के 65 साल के एक बुजुर्ग शामिल हैं. इन घटनाओं के बाद राज्य में सियासी बहस तेज हो गई है.
विपक्ष ने इन मौतों के लिए स्वास्थ्य मंत्री को जिम्मेदार ठहराया है. विपक्ष का आरोप है कि एक साल पहले 108 एंबुलेंस सेवा का ठेका मेरिट के बजाय परिचय के आधार पर सम्मान फाउंडेशन को दिया गया था. विपक्ष का दावा है कि फाउंडेशन से जुड़े लोग स्वास्थ्य मंत्री के करीबी हैं.
विपक्ष का कहना है कि एंबुलेंस चालकों को पिछले 5 से 7 महीनों से वेतन नहीं मिला है. कई एंबुलेंस खराब हालत में हैं. इंजन या टायर खराब होने पर गाड़ियां लंबे समय तक खड़ी रहती हैं. ऐसे में जरूरतमंद मरीजों तक समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पा रही है.
विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया है कि सरकार ने पिछले महीने सम्मान फाउंडेशन के साथ समझौता खत्म कर दिया, लेकिन इस दौरान हुई मौतों के लिए क्या फाउंडेशन पर कोई कार्रवाई या जुर्माना लगाया गया. साथ ही एंबुलेंस कर्मचारियों का बकाया वेतन कौन देगा, फाउंडेशन या स्वास्थ्य विभाग.
वहीं, सत्ता पक्ष ने भी व्यवस्था में कमियां होने की बात मानी है. कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि सरकार चाहती है कि अस्पताल या एंबुलेंस की लापरवाही से किसी मरीज की जान न जाए. लेकिन यह दुखद है कि अभी भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं.
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और मंत्री को पूरे मामले की गंभीर जांच करनी चाहिए. यह पता लगाया जाना चाहिए कि व्यवस्था कहां कमजोर हो रही है और किस वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं. उन्होंने कहा कि सिस्टम की कमियों को दूर कर एंबुलेंस सेवा को मजबूत बनाना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान लापरवाही के कारण न जाए.
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