Ranchi: झारखंड में अवैध हथियारों के धंधे का तरीका बदलता नजर आ रहा है. पहले जहां हथियारों की खरीद-फरोख्त आपराधिक गिरोहों और बिचौलियों के जरिए गुप्त रूप से होती थी, वहीं अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस अवैध धंधे का नया माध्यम बनता जा रहा है.
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आई है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री की जा रही हैं, जिसमें सबसे ज्यादा युवा शामिल पाए जा रहे हैं.
सोशल मीडिया पर हथियार के साथ फोटो और वीडियो पोस्ट
पिछले कुछ वर्षों में झारखंड के कई जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां युवक सोशल मीडिया पर हथियार के साथ फोटो और वीडियो पोस्ट करते पाए गए. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कई बार इन पोस्टों के जरिए संभावित खरीदारों से संपर्क स्थापित किया जाता है. इसके बाद निजी मैसेज या गुप्त ग्रुप के माध्यम से हथियार की कीमत और डिलीवरी को लेकर बातचीत होती है.
इस तरह होती है अवैध हथियारों की खरीद फरोख्त
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए हथियारों के कारोबार में शामिल लोग अक्सर फर्जी या अस्थायी अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं. आरोपी पहले हथियार के साथ फोटो या वीडियो पोस्ट करते हैं, जिससे लोगों का ध्यान आकर्षित होता है. इसके बाद इच्छुक लोगों से निजी चैट के माध्यम से संपर्क किया जाता है. कई मामलों में हथियारों की कीमत और डिलीवरी की जानकारी भी निजी संदेशों में साझा की जाती है, ताकि सार्वजनिक रूप से किसी तरह का सबूत सामने न आए.
इस गतिविधि में सबसे ज़्यादा युवा शामिल
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस अवैध गतिविधि में युवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. 18 से 30 वर्ष की उम्र के युवक सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय होते हैं, इसलिए अपराधी गिरोह उन्हें आसानी से अपने नेटवर्क में शामिल कर लेते हैं. कई बार युवाओं को पैसे या दबदबा बनाने का लालच देकर इस तरह के काम में लगाया जाता है.
पुलिस ने कई अपराधियों को दबोचा
राज्य के कई जिलों में पुलिस ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान ऐसे मामलों का खुलासा किया है. रांची, धनबाद, बोकारो, पलामू, हजारीबाग, चतरा और पूर्वी सिंहभूम समेत अन्य जिलों में युवकों को हथियार के साथ सोशल मीडिया पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. कुछ मामलों में पुलिस ने आरोपियों के पास से देसी पिस्टल, कट्टा और जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं.
तीसरे व्यक्ति से कराई जाती हथियारों की सप्लाई
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए संपर्क होने के बाद हथियार की डिलीवरी अक्सर किसी तीसरे व्यक्ति के माध्यम से कराई जाती है. इससे असली सप्लायर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. कई मामलों में आरोपी कोड वर्ड का इस्तेमाल करते हैं, जिससे बातचीत में सीधे तौर पर हथियार का जिक्र न हो. इसके अलावा कई आरोपी अस्थायी अकाउंट बनाकर इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देते हैं और काम पूरा होने के बाद अकाउंट बंद कर देते हैं.
सोशल मीडिया के कारण तेजी से फैल रहा नेटवर्क
झारखंड के कुछ जिलों से अवैध हथियार निर्माण की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं. सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों में छोटे स्तर पर हथियार बनाने और उनकी सप्लाई का नेटवर्क सक्रिय रहा है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यही नेटवर्क अब सोशल मीडिया के जरिए नए ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है. सोशल मीडिया के कारण यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, इसलिए पुलिस इसे गंभीरता से ले रही है.
चुनौती से निपटने के लिए पुलिस कर रही काम
पुलिस ने इस चुनौती से निपटने के लिए साइबर मॉनिटरिंग को और मजबूत किया है. कई जिलों में साइबर सेल और विशेष टीमें बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. किसी भी तरह की संदिग्ध पोस्ट या वीडियो सामने आने पर तुरंत जांच शुरू कर दी जाती है और संबंधित व्यक्ति की पहचान कर कार्रवाई की जाती है.
हथियार के साथ फोटो पोस्ट करना कानूनन अपराध
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर हथियार के साथ फोटो या वीडियो पोस्ट करना भी कानूनन अपराध है. आर्म्स एक्ट के तहत इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है. कई मामलों में सिर्फ फोटो पोस्ट करने पर भी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
पुलिस की आमजन से अपील
पुलिस ने युवाओं और अभिभावकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करें और किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से दूर रहें. अधिकारियों का कहना है कि कई युवक शौक या दिखावे के लिए हथियार के साथ फोटो या वीडियो पोस्ट कर देते हैं, लेकिन इससे उन्हें गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यम के बढ़ते प्रभाव के कारण अपराध के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं. पहले जहां अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए व्यक्तिगत संपर्क जरूरी होता था, वहीं अब इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से यह काम अपेक्षाकृत आसान हो गया है. ऐसे में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं.
अवैध नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रही पुलिस
फिलहाल झारखंड पुलिस सोशल मीडिया के जरिए हो रही हथियारों की खरीद-फरोख्त पर कड़ी नजर रखे हुए है. तकनीकी निगरानी बढ़ाने और लगातार कार्रवाई के जरिए इस तरह के अवैध नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा जा सके.
सोशल मीडिया के जरिए हथियार खरीदने व पोस्ट करने वालों की गिरफ्तारी
3 जून 2025 : पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत दाली गांव से 20 वर्षीय युवक तौफीक अंसारी को गिरफ्तार किया गया. आरोपी ने सोशल मीडिया पर देसी पिस्टल के साथ वीडियो पोस्ट किया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. जांच में पता चला कि उसने करीब 5 हजार रुपये में अवैध पिस्टल खरीदी थी. पुलिस ने उसके पास से पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए थे.
8 जुलाई 2025 : पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के उलिडीह थाना क्षेत्र से सोशल मीडिया पर हथियार के साथ फोटो पोस्ट करने के मामले में रितेश सिंह, अशोक गुप्ता और राजकुमार मुखिया को गिरफ्तार किया गया. वायरल फोटो में तीनों युवक देसी पिस्टल के साथ दिख रहे थे. पुलिस ने छापेमारी कर दो पिस्टल और मोबाइल फोन भी जब्त किए थे.
11 अक्टूबर 2025 : लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र अंतर्गत टोरी साइडिंग से अवधेश यादव (26) और उपेंद्र यादव (24) को गिरफ्तार किया गया. दोनों अपराधी एक गिरोह से जुड़े थे और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे. गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनके पास से देसी पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किए गए थे. पुलिस के अनुसार, दोनों पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं.
18 अप्रैल 2025 : धनबाद के बैंक मोड़ थाना क्षेत्र से वाहन जांच के दौरान नौशाद आलम (42) नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. उसके पास से देसी पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए. जांच में सामने आया कि आरोपी आपराधिक गिरोह से जुड़ा था और हथियार सप्लाई करने का काम करता था.
3 फरवरी 2025 : साहिबगंज के नगर थाना क्षेत्र से पुलिस ने सोशल मीडिया पर पिस्टल के साथ वीडियो वायरल होने के बाद युवक को गिरफ्तार किया. साथ ही हथियार जब्त किया. जांच में पता चला कि 5 हजार हथियार खरीदा था. पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.
15 मई 2025 : हजारीबाग जिले के सदर थाना क्षेत्र से इंस्टाग्राम रील में हथियार दिखाने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया. जांच में सामने आया कि आरोपी ने किसी युवक से हथियार खरीदा था और उसके साथ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था.
7 जनवरी 2025 : लातेहार जिले में पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए हथियार खरीदने की कोशिश करने वाले दो युवकों को पकड़कर पूछताछ की. पूछताछ के क्रम में पता चला कि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए लोग हथियार खरीदा था. पुलिस ने दोनों युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
12 फरवरी 2025 : लोहरदगा में अवैध हथियार रखने और सोशल मीडिया संपर्क के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. बाद में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.
2 मई 2024 : सिमडेगा में अवैध पिस्टल के साथ युवक पकड़ा गया, उसके सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की गई. बाद में पता चला कि यह भी सोशल मीडिया के जरिए ही पिस्टल खरीदा था.
12 अगस्त 2024 : रांची के ओरमांझी क्षेत्र में एक युवक ने इंस्टाग्राम पर पिस्टल के साथ फोटो पोस्ट कर इलाके में दहशत फैलाने की कोशिश की. सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान पुलिस को इसकी जानकारी मिली. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया.
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