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झारखंड टी-20 : बाहर लोग मौत से लड़ रहे थे और अंदर आयोजक रोमांच उठा रहे थे

अखबारों में जेएससीए अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव व एसजे अपलिफ्ट के कर्ताधर्ता संभव जैन का बयान छपा है. उनके बयान से ऐसा लगता है कि वहां पहुंचे दर्शक ही दोषी हैं. उनका बयान छपा है कि दर्शकों ने उत्पात मचाया, तब लाठी चार्ज हुई. यानी उनकी कोई जिम्मेदारी बनती ही नहीं है. ट्रॉफी के साथ अखबारों में जो तस्वीर छपी है, उसमें इन सबके चेहरे पर भगदड़ का कोई अफसोस भी नहीं दिखता है.
 

Ranchi : झारखंड टी-20 क्रिकेट का फाईनल मैच अव्यवस्था का शिकार बन गया. स्टेडियम के बाहर भगदड़ मची. करीब दो दर्जन लोग जमीन पर गिर गये. भीड़ उन्हें कुचलती चली गई. स्टेडियम के बाहर लोग मौत से लड़ रहे थे और भीतर जेएससीए व आयोजन समिति के पदाधिकारी मैच का मजा ले रहे थे. 

 

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अव्यवस्था व भगदड़ के लिए कोई जिम्मेदार है, तो वह जेएससीए के पदाधिकारी, आयोजन करने वाला एसजे अपलिफ्ट कंपनी व एबी स्पोर्ट्स के प्रतीक जैन. इन तीनों की साझा जिम्मेदारी थी कि अव्यवस्था ना हो, दर्शकों को दिक्कत ना हो. वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था स्टेडियम से दूर हो. पर तीनों ही अलग तरह की दुनिया में मग्न रहे. 

 

अखबारों में जेएससीए अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव व एसजे अपलिफ्ट के कर्ताधर्ता संभव जैन का बयान छपा है. उनके बयान से ऐसा लगता है कि वहां पहुंचे दर्शक ही दोषी हैं. उनका बयान छपा है कि दर्शकों ने उत्पात मचाया, तब लाठी चार्ज हुई. यानी उनकी कोई जिम्मेदारी बनती ही नहीं है. ट्रॉफी के साथ अखबारों में जो तस्वीर छपी है, उसमें इन सबके चेहरे पर भगदड़ का कोई अफसोस भी नहीं दिखता है. 

 

बड़ा सवाल यह है कि अगर जेएससीए व्यवस्था कर पाने में सक्षम है ही नहीं तो फिर दर्शकों को आमंत्रित किया ही क्यों? अगर लोगों को आमंत्रित किया था तो रांची प्रशासन के साथ सामंजस्य बनाकर व्यवस्था क्यों नहीं की? क्यों खुद को सिस्टम से ऊपर समझने लगे, जिससे लोगों की जान को खतरे में पड़ा? सवाल यह भी की क्या प्रशासन इस आयोजन के लिए बनी निकम्मी तिकड़ी के खिलाफ कार्रवाई करेगी? 

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