Ranchi: गुमला ट्रेजरी से पति-पत्नी दोनों का वेतन एक ही खाते में जमा होना घोटाले के संदेह का कारण बना. वित्त विभाग के आदेश के आलोक में हुई जांच में पति-पत्नी के वेतन की निकासी एक ही खाते में होने की पुष्टि हुई है. पति-पत्नी दोनों टीचर हैं. पत्नी नवंबर 2024 में रिटायर हो चुकी हैं. जिला शिक्षा अधीक्षक की रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है. लेकिन खाते में लेनदेन के आंकड़ों में 9.38 लाख रुपये का अंतर पाया गया है.
महालेखाकार से प्रारंभिक जांच के दौरान गुमला ट्रेजरी से भी वेतन मद में अवैध निकासी की सूचना सरकार को दी थी. महालेखाकार की ओर से वित्त विभाग को दी गयी सूचना में यह कहा गया था कि गुमला ट्रेजरी से एक खाते में दो व्यक्तियों के वेतन की निकासी हुई. महालेखाकार द्वारी दी गयी सूचना में कहा गया था कि लगनू उरांव के स्टेट बैंक, पालकोट स्थित खाते में दो Payee ID से 39 बार में 28.39 लाख रुपये की निकासी हुई है. निकासी की अवधि जनवरी 2024 से नवंबर 2024 तक है.
महालेखाकार से मिली सूचना के आधार पर वित्त विभाग ने पलामू के उपायुक्त को मामले की जांच का आदेश दिया. उपायुक्त ने लगनू उरांव के खाते से हुई निकासी का स्थानीय स्तर पर जांच का आदेश दिया. उपायुक्त के आदेश के आलोक में जिला शिक्षा अधीक्षक ने मामले की जांच कर उपायुक्त को अपनी रिपोर्ट सौंपी.
जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा सौंपी गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टेट बैंक का अकाउंट नंबर 30991687413 ज्वाइंट अकाउंट है. यह लगनू उरांव और सुनीता लकड़ा के नाम पर है. लगनू उरांव और सुनीता लकड़ा दोनों शिक्षक और पति-पत्नी हैं. दोनों द्वारा दिये गये शपथ पत्र के आधार पर दोनों का वेतन भुगतान एक ही खाते में किया जाता है. दोनों शिक्षकों द्वारा आयकर अधिनियम का पालन करते हुए अलग-अलग आयकर रिटर्न दाखिल किया जाता है.
लगनू उरांव राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय में सहायक शिक्षक और सुनीता लकड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय भेलवाडीह में पदस्थापित थी. वह नवंबर 2024 में रिटायर हुई. इन दोनों के संयुक्त खाते में जनवरी 2024 से नवंबर 2024 तक 13 बार में 19 लाख 530 रुपये की निकासी हुई है. इसमें लगनू उरांव को वेतन के रूप में 9.94 लाख और सुनीता लकड़ा को 9.05 लाख रुपये मिली राशि शामिल है. स्थानीय स्तर पर हुई जांच और महालेखाकार द्वारा दी गयी सूचना में निकासी के मामले में 9.38 लाख का अंतर है. जिला शिक्षा अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि महालेखाकार की रिपोर्ट में वर्णित निकासी का आंकड़ा सही प्रतीत नहीं होता है.
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