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विधानसभा में बोले सीएम हेमंत सोरेन - 2050 में झारखंड देश का अग्रणी राज्य बनेगा

  • अंगदान सबसे बड़ा दान, झारखंड में अंगदान आयोग बनाएंगे.
  • - पहली बार विपक्ष की तरफ से एक भी संशोधन नहीं आया.
  • - हम लोग जिंदा लोगों पर माल्यार्पण नहीं करते, सच्चाई की बात करते हैं.

Ranchi: राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में दर्जन भर सदस्यों ने हिस्सा लिया. सभी का आभार और सम्मान. सरकार के उत्तर में बहुत लंबी बातें भी कही जा सकती है और जरूरतभर भी कही जा सकती है. भलें ही गिने-चुने लोग यहां उपस्थित हैं. शायद भविष्य में भी यही या इससे भी बुरी स्थिति हो. 25 साल के झारखंड के सफर में इस बजट सत्र में नयी चीज देखने को मिली. पहली बार आज इस अभिभाषण पर कोई भी संशोधन नहीं आया. यह पहली बार है. संशोधन नहीं लाकर, आप सब लोगों ने भले ही ऊपर से, अखबार में छपने के लिए सरकार को खोरी-खोटी सुनाते हैं. लेकिन सरकार की उपलब्धियों को मानने लगे हैं. इसके लिए बहुत-बहुत आभार. 


इतने बात में भी बात को खत्म किया जा सकता था. राज्यपाल महोदय ने जिन चीजों को सदन के समक्ष रखा, सभी चीजें राज्य की जनता के समक्ष है और जो चीज सरकार आज कर रही है या लगातार करती आ रही है, वह कागज पर नहीं, जमीन पर दिखता है. राज्य की जनता को दिखता है. यही वजह है कि आज कई ऐसी चीजें हैं, जिसे दूसरे राज्य अपना रहे हैं. पहले हम दूसरे राज्यों की कॉपी करते थे. यह छोटी बात नहीं है.
एक कहावत है- पेड़ लगाएंगे बबूल का तो आम कहां से फलेगा. इस राज्य में पेड़ लगाने का काम आप (विपक्ष) ने ही किया था. आज हमने आपके बबूल के पेड़ को हटा कर आम का पेड़ लगाया है. सभी को इसका लाभ मिल रहा है. 

 


हमारी गठबंधन की सरकार है. डबल इंजन की सरकार का हाल भी इस राज्य ने देखा. कई राज्य देख रहे हैं. बहुत जल्द वह दिन आयेगा कि डबल इंजन की सरकारें धाराशायी होंगे. कई चुनौतियों के बावजूद, संविधान को, परंपराओं को हमने मजबूत किया. लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की. जहां आप (विपक्ष) जो कहें, वही कानून है. अगर नियम साफ हो और संकल्प दृढ़ हो, तो सरकार सीमित संशाधनों में भी कई काम करती है. 


नीरा यादव की टोक टिप्पणी पर सीएम ने कहा कि हम लोग जिंदा लोगों पर माल्यापर्ण नहीं करते हैं. हमलोग सच्चाई पर जीते हैं. सरकार की मूल जिम्मेदारी है, किसान करीब का सहारा बनना. वही बनते हैं. 


25 सालों में हमने जो लकीर खींची है, उसे मिटाना भी आपके बस की बात नहीं है. न ही उस पर काम करने की इच्छा या मंशा रहा हो. सामाजिक सुरक्षा, अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य. अभिभाषण में कितनी सत्यता है कि हम लोग पूरे राज्य में. अभी तो शुरुआत है. 2050 में राज्य अग्रणी राज्य बनेगा.
साईबर अपराध, जहां देश-दुनिया परेशान है. आप लोग फर्जी एआई करा रहे हैं. चीन से सामान लाकर यहां अपना बता रहे हैं. सिर्फ नेताओं का. यह हालत है. फोटो-पोस्टर पर देश का विकास नहीं होता है. विकास धरातल पर काम करके होता है.


हमारी सरकार गांव से चलने वाली सरकार है. गांव मजबूत होगा तभी शहर राज्य मजबूत होगा. ये लोग उल्टा गंगा बहाते हैं. देश आज कर्ज से लद गया है. देश को दूसरे देशों के हाथ में गिरवी रख दिया जा रहा है. किसान-मजदूर की हालत भविष्य में क्या हालत होगी? किसान की बात कर रहे थे, जब बाहर के फसल, नमक तेल आने लगेगा तो इस देश के किसानों का क्या होगा? इन लोगों ने हर वो काम किया, जिससे रोज कमाने खाने वाले कैसे जिएंगे, कहना मुश्किल है. विरोध करने वालों को देशद्रोही कहते हैं.

 


एआई समिट में विरोध करने वालों को देशद्रोही कहने लगे हैं. सबको पता है, इस देश का एक गौरव क्षण, एक नया अध्याय, जब मैं दावोस गया था, पूरी दुनिया के लोग थे वहां और वहां के मुख्य अतिथि के रुप में अमेरिका के बॉस थे, उनका भी विरोध हुआ था, लेकिन उनको देशद्रोही नहीं कहा गया. इन लोगों के विरोध में आवाज बुलंद करने वालों को देशद्रोही कहा जाता है.


आज हम लोग इतने संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं, देश के लोग जान समझ रहे हैं. अगर यही हालात बनी रही तो वो दिन दूर नहीं जब लोग... देश के अंदर ही बेगाना सा स्थिति. नया देश बनाने का प्रयास हो रहा है. मणिपुर की हालत देख लीजिये. एक राज्य दूसरे राज्य की पुलिस के संघर्ष करता है. हिन्दु-मुस्लिम के जहर को समंदर बना दिया. मानवता को तार-तार करके रख दिया.

 

राज्यपाल के अभिभाषण में जो पढ़ा गया, लगभग वही सब मैं भी बोलने वाला था. विपक्ष के लोग सुनने को तैयार नहीं. पेशेंस नहीं. सुनने व साथ देने का मंशा नहीं रहा. यह सदन है, जहां विपक्ष की बात संयम से सुनते हैं. दिल्ली में विपक्ष के साथ क्या हो रहा है. विपक्ष के नेता को बोलने से रोक दिया जाता है. यहां विपक्ष जो बोलना है, बोल के निकल जाते हैं. इनका हर काम सब संवैधानिक, हमारा असंवैधानिक. 

 

सीएम ने एक घटना का जिक्र किया, जिसे मर्माहत करने वाला बताया. जब यह खबर पढ़ी तो दो मिनट के लिए सहम सा गया. कुछ दिन पहले एक दस महीने की बच्ची ने पूरे शरीर का अंग दान किया. वह बेचारी किसी घटना में ब्रेन डेड हो गयी. उसके माता-पिता ने अपने जिगर के टुकड़े को देश को समर्पित किया. बच्ची का नाम था आलम जेली अब्राहम. उसने अपना अंगदान किया. उनके माता-पिता का नाम है सरीन आन जॉन और अनिल अब्राहम. उन्होंने जो साहस दिखाया. बच्ची का अंगदान किया. सैंकड़ों लोगों की जानें किसी अंग के खराब होने से चली जाती है. उस बच्ची के अंग दान से कितने लोगों, हिन्दु, मुसलमान, ईसाई होंगे, उन्हें नई जिंदगी मिलेगी. ये लोग ऐसे लोगों से भी घृणा करते हैं. यह किता बुरा है. हम लोग आम लोगों के जीवन बचाने पर काम करेंगे. मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि झारखंड में अंगदान आयोग बनेगा. ताकि अंगदान को प्रोत्साहन मिले और जिनके कोई अंग खराब हो जाये, वह नहीं जिंदगी जी सकें.


हमारे विपक्ष वाद-विवाद में तो हिस्सा लिया, लेकिन कोई संशोधन नहीं आया. कुल मिलाकर कह सकते हैं कि सरकार के कामों से ये घबराये हुए हैं. अभी हम लोगों के वैश्विक मंच का परिणाम जब दिखने लगेगा, तो घबराहट कहीं हार्ट अटैक में ना बदल जाये. हमलोगों ने खुद से और राज्य की सवा तीन करोड़ जनता से वायदा किया है- हर व्यक्ति को साथ लेकर चलने का, देश के सबसे पिछड़े राज्य को अग्रणी राज्य में ले जाने का. यह बहुत बड़ी चुनौती है. हमारा केंद्र के साथ जो संबंध है, वह खुले तौर पर है. उस पर चर्चा की जरुरत नहीं. लेकिन मैं समझता हूं कि दृढ़ संकल्प हो तो हर असंभव काम सफल हो सकता है.

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