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भारत टेक्स में मिली झारखंडी शिल्प उत्पादों को नई पहचान, निर्यात का मौका बढ़ा

झारखंड के बांस शिल्प कला को नई पहचान स्थापित हुई है. दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स 2026 में झारखंडी शिल्प की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई है. खरीददारों ने झारखंड में बनी बांस के जुड़े उत्पादों की तारीफ की है. साथ ही लोगों ने माना है कि बांस से बने सामान पर्यावरण के अनुकुल है.
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New Delhi/Ranchi : झारखंड के बांस शिल्प कला को नई पहचान स्थापित हुई है. दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स 2026 में झारखंडी शिल्प की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई है. खरीददारों ने झारखंड में बनी बांस के जुड़े उत्पादों की तारीफ की है. साथ ही लोगों ने माना है कि बांस से बने सामान पर्यावरण के अनुकुल है.


झारखंड में निर्मित बांस से बने उत्पादों की कई खासियतों को लोगों ने सराहा. जिनमें बास से बने बोतल, मग भी शामिल है. जिसकी वजह से पेय पदार्थ तीन चार घंटे तक अपनी मौलिक स्थिति को कायम रखती है. 


भारत टेक्स मेला में झारखंड के सिल्क, जीआई टैग उत्पादों, हस्तकरघा, हस्तशिल्प के उत्पादों ने भी लोगों को बहुत लुभाया है. साथ ही झारखंड के कारीगरों को यह मौका दिया है कि वह यहां बने उत्पादों को विदेशों में निर्यात कर सकते हैं. 


भारत मंडपम में झारखंड के जिन उत्पादों की प्रदर्शनी लगायी गयी हैं, उनमें क्लस्टर बांस से बनी सजावती वस्तुएं, फर्नीचर को शामिल किया गया है. इन उत्पादों की डिजाइन लेजर कटिंग, लेजर एनग्रेविंग, सीएनसी राउटिंग का इस्तेमाल करके कस्टमाइज किया गया है. इस कारण ये उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों व गुणवत्ता के अनुरूप है.


उल्लेखनीय है कि भारत टेक्स 2026 में दुनियाभर के 130 देशों के छह हजार से अधिक दुकान लगाये गये हैं. इन दुकानों में 1.3 लाख से अधिक खरीददारों ने खरीददारी की है.

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