- झारखंड में डिजिटल व्यवस्था पर उठे सवाल
- ऑनलाइन एफआईआर सेवा ठप होने से जनता में बढ़ी नाराजगी
Sanjit Yadav
Ranchi : देश तेजी से डिजिटल युग की ओर बढ़ रहा है. शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, सुगमता और त्वरित सेवा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन और आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
लेकिन झारखंड में डिजिटल व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही है. राज्य में पिछले 15 दिनों से ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने की सुविधा पूरी तरह ठप पड़ी है. इस तकनीकी बाधा के कारण आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
जानकारी के अनुसार, झारखंड पुलिस की ऑनलाइन FIR प्रणाली तकनीकी कारणों से काम नहीं कर रही है. ऐसे में चोरी, साइबर ठगी, दस्तावेज गुम होने या अन्य शिकायतों के लिए लोगों को थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. डिजिटल सुविधा के दावे के बीच यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है.
राज्य में ऑनलाइन एफआईआर की सुविधा शुरू करने का उद्देश्य यही था कि लोगों को छोटी-छोटी शिकायतों के लिए थानों के चक्कर न लगाने पड़ें और वे घर बैठे ही आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकें.
यह व्यवस्था विशेषकर दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए राहत का माध्यम मानी जा रही थी. लेकिन सेवा ठप होने से स्थिति उलट गई है. लोगों को मजबूरन थानों का रुख करना पड़ रहा है.
इससे न केवल उनका समय और पैसा व्यर्थ हो रहा है, बल्कि शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी भी हो रही है. इससे आम नागरिकों में असंतोष और नाराजगी बढ़ रही है.
इस बीच यह सवाल उठने लगा है कि जब पुलिस का स्लोगन “सेवा ही तत्परता” है, तो फिर इतनी महत्वपूर्ण सेवा इतने दिनों तक बंद क्यों है. तकनीकी समस्या कब तक दूर होगी, इसको लेकर अभी तक आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
कुछ लोगों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सिस्टम का नियमित रखरखाव और त्वरित समाधान जरूरी है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे.
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि झारखंड पुलिस ऑनलाइन FIR सेवा को कब तक बहाल करती है और डिजिटल व्यवस्था को कितना मजबूत बनाती है.
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