Ranchi: राज्य में नेत्र रोग उपचार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के उद्देश्य से झारखंड ऑप्थल्मोलॉजी सोसाइटी का 23वां वार्षिक सम्मेलन JHOSCON 2026 आज स्वर्णभूमि, पुरुलिया रोड में आरंभ हुआ. सम्मेलन के पहले ही दिन वैज्ञानिक गंभीरता, तकनीकी नवाचार और शैक्षणिक ऊर्जा का संतुलित संगम देखने को मिला.
देश के विभिन्न हिस्सों से आए 60 से 70 वरिष्ठ राष्ट्रीय वक्ताओं ने सम्मेलन में शिरकत की. ऑकुलोप्लास्टी, स्क्विंट, कॉर्निया, मोतियाबिंद और रेटिना जैसे विषयों पर आधुनिक सर्जिकल पद्धतियों और Preferred Practice Pattern को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ. सर्जिकल वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से जटिल प्रक्रियाओं को सरल और व्यावहारिक रूप में समझाया गया. झारखंड के सरकारी और निजी संस्थानों से जुड़े लगभग 200 नेत्र विशेषज्ञों की भागीदारी ने सम्मेलन को व्यापक स्वरूप दिया.
शोध और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी सम्मेलन ने विशेष पहचान बनाई. पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धी सत्र आयोजित किए गए, जहां उन्हें अपने शोध प्रस्तुत करने और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन पाने का अवसर मिला. यह मंच युवा चिकित्सकों के आत्मविश्वास और कौशल विकास के लिए अहम साबित हुआ.
पहले दिन की प्रमुख गतिविधियों में JHOS AIOS कनेक्ट प्रयोगशाला का आयोजन रहा. यहां अत्याधुनिक माइक्रोस्कोप के जरिए फेको कैटरेक्ट सर्जरी, IPCL और आयरिस क्लॉ लेंस जैसी नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया. छात्रों के साथ-साथ वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञों ने भी इन सत्रों में सक्रिय भागीदारी की.
वैज्ञानिक सत्रों के अंतर्गत फिजिकल पोस्टर और प्रतिस्पर्धी वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से झारखंड के नेत्र चिकित्सकों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. सम्मेलन का आधिकारिक उद्घाटन 14 फरवरी को शाम 6.00 बजे प्रस्तावित है, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी.
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