Lagatar Desk : हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है. इस साल जितिया व्रत की पूजा 3 अक्टूबर शनिवार को होगी. इस वर्त को माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं.
जितिया व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जीमूतवाहन की पूजा और व्रत करने से संतान की रक्षा और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है. यह व्रत तीन दिनों तक चलता है और इसमें कई कठिन नियमों का पालन किया जाता है.
पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - 04:38 शाम से 05:26 शाम
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 6:05 बजे से रात 8:29 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:38 बजे से 5:26 बजे तक
जितिया की पूजा प्रदोष काल और सूर्यास्त के बाद करने की परंपरा है.
कब होगा व्रत का पारण
जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर रविवार को किया जाएगा. पारण सुबह 7:28 बजे के बाद किया जा सकेगा.
तीन दिनों में पूरा होता है जितिया व्रत
पहला दिन- नहाय-खाय : सप्तमी तिथि को स्नान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है.
दूसरा दिन- जितिया व्रत: अष्टमी तिथि को महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं.
तीसरा दिन- पारण: नवमी तिथि को पूजा और सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है.
जितिया से जुड़ी कथाएं
जितिया व्रत से राजा जीमूतवाहन, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा परीक्षित को जीवनदान देने और चील-सियारिन की कथा जुड़ी हुई है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए त्याग और बलिदान किया था. वहीं चील-सियारिन की कथा व्रत में श्रद्धा और नियमों के पालन का महत्व बताती है.

