Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने पर खुशी जताई है. पार्टी ने इसे झारखंड, आदिवासी समाज और अलग राज्य आंदोलन से जुड़े लाखों लोगों के संघर्ष का सम्मान बताया है.
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झामुमो के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि शिबू सोरेन का पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन, सामाजिक न्याय और वंचित समुदायों के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित रहा. उन्होंने कहा कि नेमरा गांव से शुरू हुआ उनका संघर्ष झारखंड राज्य के निर्माण तक पहुंचा और उन्होंने करोड़ों लोगों की आवाज को राष्ट्रीय पहचान दिलाई.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में रूपी सोरेन द्वारा पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया जाना झारखंड के लिए गर्व और भावनात्मक क्षण था. यह सम्मान केवल शिबू सोरेन का नहीं, बल्कि उस आंदोलन और विचारधारा का भी सम्मान है, जिसने झारखंड को अलग पहचान दिलाई.
विनोद पांडेय ने कहा कि पद्म भूषण देकर देश ने शिबू सोरेन के योगदान को स्वीकार किया है. हालांकि उनका मानना है कि गुरुजी का योगदान इतना बड़ा है कि उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने सिर्फ झारखंड राज्य आंदोलन का नेतृत्व नहीं किया, बल्कि आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए भी जीवनभर संघर्ष किया. उनके विचार और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे.
झामुमो ने केंद्र सरकार से मांग की है कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक न्याय और जनहित के क्षेत्र में शिबू सोरेन के योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न देने पर गंभीरता से विचार किया जाए.
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