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JMM: आदिवासियों की पहचान के लिए ‘सरना धर्म कोड’ जरूरी, जनगणना में अलग कॉलम की मांग

राजधानी रांची के हरमू स्थित JMM पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीयो भट्टचार्य ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि 2014 में महंगाई के खिलाफ दिए गए नारे अब गद्दी छोड़ो मोदी सरकार में बदल गए हैं.
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Ranchi: राजधानी रांची के हरमू स्थित JMM पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीयो भट्टचार्य ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि 2014 में महंगाई के खिलाफ दिए गए नारे अब गद्दी छोड़ो मोदी सरकार में बदल गए हैं.

 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में खाद्य पदार्थ, ऊर्जा और यात्रा किराया जैसे क्षेत्रों में कीमतें दो से ढाई गुना तक बढ़ गई हैं. उन्होंने बताया कि कमर्शियल गैस की कीमत 2014 में 950 रुपये थी, जो अब 2000 रुपये के पार पहुंच गई है. इससे होटल और कैटरिंग व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने यह भी आशंका जताई कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आने वाले समय में और बढ़ोतरी हो सकती है.

 

उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण भूखमरी की स्थिति पैदा हो रही है और स्ट्रीट फूड कारोबार तथा विद्यार्थियों के हॉस्टल बंद हो रहे हैं. अर्थव्यवस्था पर चिंता जताते हुए उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय भारत से अधिक हो गई है और भारतीय रुपया बांग्लादेशी टका के मुकाबले कमजोर हुआ है.

 

रेलवे के मुद्दे पर उन्होंने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में रिजेक्ट होने वाली ट्रेनों को झारखंड भेज दिया जाता है, जबकि राज्य देश को सबसे अधिक राजस्व देता है. इसके बावजूद यहां रेल सुरक्षा और मेंटेनेंस की स्थिति खराब है.

 

बाबूलाल मरांडी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन विधेयक पर उनकी बातें हास्यास्पद हैं. उन्होंने मांग की कि 33 प्रतिशत आरक्षण सभी निर्वाचित संस्थाओं जैसे पंचायत और नगर निकाय में भी लागू होना चाहिए.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावों को युद्ध की तरह लड़ रही है और केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ किया जा रहा है. आदिवासी पहचान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर 2027 की जनगणना में सरना धर्म कोड शामिल करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की पहचान को सुरक्षित रखना जरूरी है और इसके लिए जनगणना में अलग कॉलम जोड़ा जाना चाहिए.

 

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