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जेएनएसी में अवैध निर्माण तोड़ने का मामला: HC ने 7 प्रतिवादियों की याचिका की खारिज

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन से जुड़े मामले में राकेश कुमार झा की जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की. मामले में सात प्रतिवादियों व हस्तक्षेपकर्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई. 


हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले याचिकाकर्ता को राहत नहीं देते हुए उनकी भी याचिका खारिज कर दी. खंडपीठ ने कहा कि इस संबंध में बुधवार को ही आदेश पारित किया जा चुका है. इससे पूर्व प्रतिवादियों व हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता रवि प्रकाश मिश्रा ने कोर्ट से कहा कि उनके मामले की कल (बुधवार) सुनवाई नहीं हुई है. 


उनकी ओर से कहा गया कि मामले में नैसर्गिक न्याय और न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. अगर उन्हें मौका मिलता तो वह सिविल कोर्ट जाते और ऊपरी अदालत में अपना पक्ष रखते और कोर्ट से आदेश पारित होता.  लेकिन उन्हें इसका मौका नहीं मिला. जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र कमेटी (जेएनएसी) की अंडरटेकिंग के आधार पर हाईकोर्ट ने सभी 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण तोड़ने का आदेश दे दिया. याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से राहत देने का आग्रह किया. 


बता दें कि हाईकोर्ट ने बीते बुधवार को अपने आदेश में कहा है कि सभी 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण टूटेंगे. हाईकोर्ट ने इस संबंध में अपना आदेश पूर्व में दे दिया है, अब उसमें किसी तरह की संशोधन नहीं की जाएगी.  


प्रतिवादियों ने हाईकोर्ट के 14 जनवरी 2026 के आदेश में संशोधन करने का आग्रह कोर्ट से किया था और भवनों को तोड़ने के आदेश पर रोक लगाने की भी मांग की थी, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दिया था कि अवैध निर्माण किसी रूप में बर्दाश्त नहीं की जा सकती है, सुप्रीम कोर्ट का भी यही आदेश है.  


प्रतिवादियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए 14 जनवरी के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की बात कही थी. बता दें कि हाईकोर्ट ने 14 जनवरी की सुनवाई में प्रतिवादियों द्वारा किए गए निर्माण में पाए गए विचलन को हटाने का निर्देश दिया था. 


खंडपीठ ने जेएनएसी को एक माह के भीतर प्रतिवादियों द्वारा किए गए अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश दिया था. साथ ही अगली सुनवाई से पूर्व मामले में की गई कार्रवाई से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया था. अगली सुनवाई के लिए 9 मार्च की तिथि निर्धारित की गई है.

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