Ranchi: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में छात्रहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर विश्वविद्यालय के प्रमुख छात्र संगठनों की संयुक्त बैठक हुई. बैठक में शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्याओं पर चिंता जताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को 9 सूत्री मांगों के समाधान के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया. छात्र संगठनों ने चेतावनी दी कि समय सीमा के भीतर मांगें नहीं मानी गईं तो चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा.

बैठक में आदिवासी छात्र संघ, आजसू छात्र संघ, एनएसयूआई, झामुमो छात्र संगठन, हिंदू छात्र संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), एसएसएआई और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) सहित कई छात्र संगठन शामिल हुए.
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छात्र संगठनों ने अपनी 9 सूत्री मांगों में विश्वविद्यालय में चल रहे पेन डाउन आंदोलन को समाप्त कर शैक्षणिक गतिविधियां बहाल करने, NET, PhD और JRF से जुड़ी लंबित समस्याओं का समाधान, रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति, कॉमर्स विभाग में एजेंसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायतों की निष्पक्ष जांच, गैर-शैक्षणिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्त शिक्षकों पर कार्रवाई, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करने, अन्य संस्थानों में नियम विरुद्ध अध्यापन करने वाले शिक्षकों की जांच, प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना तथा BBA, MBA, कंप्यूटर साइंस, वाणिज्य और जनजातीय भाषाओं की सीटों में की गई कटौती वापस लेने की मांग रखी.
आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में छात्र हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है और छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास हो रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षक संघ और कर्मचारी संघ के विरोध के बावजूद सभी छात्र एकजुट होकर आंदोलन करेंगे तथा विश्वविद्यालय का संचालन छात्र हितों के अनुरूप होना चाहिए.
आजसू छात्र संघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो ने कहा कि शिक्षकों की कमी और क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं की सीटों में कटौती से विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष ने कहा कि छात्र हितों की लड़ाई में यदि जेल भी जाना पड़े तो संगठन का हर कार्यकर्ता तैयार है.
झामुमो छात्र संगठन के प्रेम प्रतीक केशरी ने कहा कि झारखंड की स्थानीय एवं जनजातीय भाषाओं के संरक्षण के लिए उनका संगठन अंतिम सांस तक संघर्ष करेगा. वहीं कमलेश महतो ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की.
संयुक्त छात्र संगठनों ने कहा कि यदि 24 घंटे के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सभी संगठन मिलकर उग्र, लेकिन लोकतांत्रिक एवं चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे. उनका कहना है कि यह संघर्ष किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों के अधिकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्थान की गरिमा की रक्षा के लिए है.
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