Ranchi News: झारखंड के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीआईजी प्रियदर्शी आलोक और पत्रकार सैयद शारीफ इब्राहिम के बीच रास्ते को लेकर चल रहा विवाद अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है. पत्रकार ने अपने और अपने परिवार के निर्बाध आवागमन, घर के गेट के सामने रखे गए ईंट-पत्थर हटाने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए क्रिमिनल रिट याचिका दायर की है. याचिका में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भी अनुरोध किया गया है.
पत्रकार की ओर से दायर याचिका में झारखंड सरकार, रांची के उपायुक्त, एसडीएम सदर, अरगोड़ा थाना प्रभारी और वर्तमान में डीआईजी रेल के पद पर पदस्थापित आईपीएस प्रियदर्शी आलोक को प्रतिवादी बनाया गया है. मामले में अधिवक्ता सौरभ दास और फहीम अख्तर पैरवी कर रहे हैं.
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1963 से रास्ते के इस्तेमाल का दावा
याचिका के अनुसार, पत्रकार का परिवार वर्ष 1963 से अशोक नगर रोड नंबर-1 की 40 फीट चौड़ी सड़क से आवागमन करता रहा है. याचिका में वर्ष 1991 में रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) से स्वीकृत भवन नक्शे का भी उल्लेख किया गया है. दावा है कि स्वीकृत नक्शे में आवासीय परिसर तक पहुंचने के लिए 12 फीट चौड़ा निजी रास्ता दर्शाया गया है, जो अशोक नगर रोड नंबर-1 से जुड़ता है.
याचिकाकर्ता के मुताबिक, उनके आवासीय परिसर में पांच अलग-अलग मकानों में करीब छह परिवार रहते हैं. इन सभी परिवारों के आवागमन का रास्ता बाधित होने से परेशानी हो रही है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि डीआईजी प्रियदर्शी आलोक ने इस रास्ते को अवैध तरीके से बाधित किया है.
सरकारी वाहन खड़ा करने और धमकी देने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 29 सितंबर 2026 की शाम करीब छह बजे डीआईजी प्रियदर्शी आलोक के इस्तेमाल में आने वाली सरकारी स्कॉर्पियो को पत्रकार के आवासीय गेट के सामने खड़ा कर दिया गया. इससे परिवार के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ. याचिकाकर्ता का दावा है कि वाहन हटाने का अनुरोध करने पर संबंधित अधिकारी अपने बॉडीगार्ड के साथ वहां पहुंचे और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी.
पत्रकार ने याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें एके-47 से गोली चलाने की धमकी दी गई. आरोप के अनुसार, वाहन के पास कोई दूसरी गाड़ी आने पर गोली चलाने की बात कही गई. इसके अलावा झूठे आपराधिक मामले में फंसाने और जीवन बर्बाद करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने 29 सितंबर को अरगोड़ा थाना में लिखित शिकायत देकर पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की थी.
एसडीएम कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी ईंट-पत्थर रखने का आरोप
याचिका के अनुसार, रास्ते के विवाद को लेकर रांची के उपायुक्त और एसडीएम सदर के समक्ष शिकायत की गई थी. संबंधित अंचल अधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम न्यायालय में Misc. Case No. M-2842/2026 के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 166 के अंतर्गत कार्यवाही शुरू की गई.
याचिकाकर्ता का आरोप है कि नोटिस जारी होने के बावजूद 3 और 4 अक्टूबर 2026 की देर रात उनके घर के गेट के सामने ईंट और पत्थर के बड़े टुकड़े रख दिए गए. इससे रास्ता बाधित हो गया. इस संबंध में याचिका के साथ तस्वीरें भी प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है.
एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड के रास्ते को लेकर भी चिंता
पत्रकार ने याचिका में कहा है कि रास्ता बाधित होने से परिवार के सामान्य आवागमन के साथ-साथ आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों को आवासीय परिसर तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है.
याचिकाकर्ता ने यह आशंका भी जताई है कि विवाद में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम होने के कारण स्थानीय पुलिस-प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद प्रभावित हो सकती है. इसी आधार पर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है.
हाईकोर्ट से क्या चाहते हैं पत्रकार?
याचिका में हाईकोर्ट से अशोक नगर रोड नंबर-1 से आवास तक निर्बाध आवागमन सुनिश्चित कराने और गेट के सामने रखे गए ईंट-पत्थर सहित अन्य अवरोध हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. साथ ही भविष्य में रास्ते पर वाहन, निर्माण सामग्री, दीवार या किसी अन्य तरीके से अवरोध उत्पन्न नहीं करने देने की मांग की गई है.
याचिकाकर्ता ने अरगोड़ा थाना में 29 सितंबर को दी गई शिकायत पर निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है. उनका अनुरोध है कि रास्ता रोकने, धमकी देने और एके-47 से गोली चलाने की कथित धमकी सहित अन्य आरोपों की जांच की जाए. यदि जांच में संज्ञेय अपराध सामने आता है, तो एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए.
इसके अलावा एसडीएम न्यायालय में लंबित कार्यवाही का शीघ्र निष्पादन करने, याचिका के अंतिम निर्णय तक रास्ते से अवरोध हटाने तथा पत्रकार और उनके परिवार की सुरक्षा, स्वतंत्रता, गरिमा और शांतिपूर्ण आवासीय जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की मांग की गई है.
फिलहाल, याचिका में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष और हाईकोर्ट की ओर से मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है. आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और न्यायालय के आदेश के संबंध में स्थिति स्पष्ट होना बाकी है.
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