Ranchi: झारखंड में फाइलेरिया के खिलाफ एक व्यापक और सुनियोजित अभियान की आज औपचारिक शुरुआत हो गई. राज्य के 14 जिलों में लागू मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम का वर्चुअल शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया.
यह अभियान न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि उस अदृश्य बीमारी से निर्णायक टकराव का संकेत भी देता है, जिसने वर्षों से समाज के कमजोर तबकों को चुपचाप प्रभावित किया है.
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारी है और इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी आवश्यक है. उन्होंने बताया कि अभियान के तहत राज्य के 91 प्रखंडों में लगभग एक करोड़ 75 लाख लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाएं दी जाएंगी. 11 जिलों में डीईसी और अल्बेंडाजोल, जबकि कोडरमा, पाकुड़ और सिमडेगा में डीईसी, अल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन की तीन दवाओं का सेवन कराया जाएगा.
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी बूथों और घर-घर जाकर लोगों को नि:शुल्क दवाएं खिलाएंगे. दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को छोड़कर सभी को स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में दवा लेनी होगी और दवाएं खाली पेट नहीं ली जाएंगी.
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी विभागों से सहयोग लेने, डिजिटल माध्यमों के जरिये प्रचार बढ़ाने और जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जब दवा हर व्यक्ति तक पहुंचेगी और हर व्यक्ति इसे स्वीकार करेगा, तभी झारखंड फाइलेरिया मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा.
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