Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) कार्यालय में सीआईडी और रांची पुलिस की संयुक्त छापेमारी के बाद अब अभ्यर्थी भी आर-पार के मूड में आ गए हैं. परीक्षा में लगातार रहो रही अनियमितताओं को लेकर जेएलकेएम (JLKM) नेता देवेंद्रनाथ महतो और जेपीएससी अभ्यर्थियों ने प्रेस वार्ता कर पुलिस-प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है.
देवेंद्रनाथ महतो ने साफ तौर पर कहा है कि यदि जांच के नाम पर केवल लीपापोती की गई, तो राज्यभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा. छात्रों ने इस कार्रवाई को लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन और मीडिया द्वारा लगातार उठाए गए मुद्दों का परिणाम बताया.
जेपीएससी अभ्यर्थियों ने दावा किया कि डुमरी विधायक व झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के सुप्रीमो जयराम महतो ने मामले से जुड़े साक्ष्य मुख्यमंत्री और राज्यपाल को सौंपे, जिसके बाद जांच में तेजी आई. इसके लिए उन्होंने उनका आभार भी जताया.
प्रेस वार्ता में छात्रों ने जेपीएससी और परीक्षा एजेंसी पर कई गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा की ओएमआर शीट पर आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे. साथ ही हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से असामान्य संख्या में अभ्यर्थियों के चयन पर भी सवाल उठाए गए.
छात्रों ने यह भी दावा किया कि एफआरओ परीक्षा की 350 और एसीएफ परीक्षा की 150 ओएमआर शीट में कथित फेरबदल हुआ है. उनका कहना है कि इस संबंध में उपलब्ध साक्ष्य पहले ही मीडिया को सौंपे जा चुके हैं.
प्रेस वार्ता में टीडीपीएल (TDPL) एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. छात्रों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश और जेएसएससी द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद यह एजेंसी जेपीएससी में ऑनलाइन आवेदन से लेकर परीक्षा परिणाम तैयार करने तक कई महत्वपूर्ण कार्य संभाल रही है.
उन्होंने एजेंसी के निदेशक सतपाल सिंह, रणधीर सिंह और मैनेजर मनोज तिवारी की भूमिका की जांच की मांग की. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि मनोज तिवारी खुद चार प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर सफल हुए हैं. इसके अलावा पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के तबादले के बाद भी आयोग में उनके आने-जाने को जांच का विषय बताया गया.
छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों का विश्वास लगातार कम हो रहा है. उनका दावा है कि हाल में आयोजित जेएसएससी फील्ड वर्कर परीक्षा में केवल 24 से 25 प्रतिशत अभ्यर्थी ही शामिल हुए, जो भर्ती प्रक्रिया में भरोसे की कमी को दर्शाता है.
छात्र संगठनों ने मांग की कि सीआईडी जांच तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए. इसके साथ ही जेपीएससी और जेएसएससी में व्यापक प्रशासनिक सुधार, नई परीक्षा एजेंसी की नियुक्ति और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठाई गई.
हालांकि प्रेस वार्ता में लगाए गए कई आरोप संबंधित पक्षों के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. मामले की जांच सीआईडी कर रही है. छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी जांच में किसी तरह की लीपापोती हुई तो वे दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर राज्यव्यापी उग्र आंदोलन शुरू करेंगे.
सीआईडी ने की थी आठ ठिकानों पर छापेमारी
गौरतलब है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में कथित भ्रष्टाचार और परीक्षा अनियमितताओं की शिकायत के बाद सीआईडी और रांची पुलिस ने मंगलवार को जेपीएससी कार्यालय, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी और कर्मचारियों से जुड़े कुल आठ ठिकानों पर छापेमारी की थी.
कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क जब्त किए गए हैं. जांच एजेंसियां संबंधित लोगों से पूछताछ भी कर रही है.
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