Ranchi: JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच AISF और AIYF के राज्य नेताओं ने संयुक्त बयान जारी किया है. नेताओं ने दावा किया कि छात्रों के आंदोलन के दबाव में झारखंड सरकार उनकी लगभग सभी मांगों पर झुक गई है.
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AISF-AIYF नेताओं ने कहा कि छात्रों को CBI और CID की जांच पर भरोसा नहीं है. ऐसे में सरकार द्वारा वर्तमान जजों की कमेटी के माध्यम से न्यायिक जांच कराने और मामले में “दूध का दूध, पानी का पानी” करने की बात मानना आंदोलन की आंशिक जीत है.
संयुक्त बयान में भाजपा पर भी निशाना साधा गया. नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा छात्रों के कंधे पर राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास कर रही है.
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के आंदोलन के दौरान भारत सरकार को झुकना पड़ा था और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. इसी खुन्नस में भाजपा अब झारखंड में बवाल खड़ा कर रही है और छात्रों के सामने घड़ियाली आंसू बहाकर नया राजनीतिक ड्रामा करने की कोशिश कर रही है.
AISF और AIYF ने छात्रों के आंदोलन की आंशिक जीत को देखते हुए 10 अगस्त को प्रस्तावित झारखंड बंद को स्थगित करने का ऐलान किया है.
संगठनों ने कहा कि बंद के बजाय 10 अगस्त को सभी छात्र संगठनों के साथ मिलकर विधानसभा मार्च किया जाएगा. इस मार्च के जरिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि न्यायिक जांच को लेकर अधिसूचना जल्द जारी की जाए.
AISF-AIYF नेताओं ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और न्यायिक जांच की अधिसूचना जारी नहीं कर दी जाती.
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