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JPSC-JSSC Protest: छात्र प्रतिनिधियों ने कहा- 'रद्द, जांच और सुधार' वापस नहीं ली जाएंगी

झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे छात्रों ने सरकार से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है. प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि उनकी तीन प्रमुख मांगें— 'रद्द, जांच और सुधार'— किसी भी स्थिति में वापस नहीं ली जाएंगी.
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Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे छात्रों ने सरकार से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है. प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि उनकी तीन प्रमुख मांगें— 'रद्द, जांच और सुधार'— किसी भी स्थिति में वापस नहीं ली जाएंगी.

 

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य अंकित कुमार ने आरोप लगाया कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL द्वारा आयोजित कई भर्ती परीक्षाओं में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं. छात्रों की मांग है कि TDPL से जुड़ी 11वीं से 14वीं JPSC, JSSC CGL, PGT और CDPO समेत अन्य परीक्षाएं रद्द कर निष्पक्ष जांच कराई जाए.

 

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छात्र प्रतिनिधि राजेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी पर होटल लीज पर लेकर सीटें बेचने के आरोप लगे हैं. उन्होंने दावा किया कि इस मामले को CID ने भी स्वीकार किया है. छात्रों ने प्रशासनिक अनियमितताओं की CBI जांच और वित्तीय मामलों की ED जांच कराने की मांग की है. राजेश ने यह भी आरोप लगाया कि एक अभ्यर्थी कम सही उत्तर देने के बावजूद कथित सेटिंग के जरिए सफल हुआ, जबकि अधिक अंक लाने वाले कई अभ्यर्थी चयन से बाहर रह गए.

 

पीयूष कुमार सिंह ने भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की भी मांग की है. इनमें परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, आयु सीमा में छूट, जिम्मेदारी तय करना, OMR शीट उपलब्ध कराना तथा आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से परीक्षाएं नहीं कराने जैसी मांगें शामिल हैं. और बताया सरकार से वार्ता के लिए गठित 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में 8 छात्र, 2 मीडियाकर्मी (तकनीकी/अभिभावक भूमिका में) और 1 कानूनविद् शामिल हैं. प्रतिनिधिमंडल की सूची प्रशासन के माध्यम से सरकार को सौंप दी गई है और अब आधिकारिक वार्ता का इंतजार किया जा रहा है.

 

प्रतिनिधिमंडल की नीतू कुजूर ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था से आदिवासी समाज के विद्यार्थी भी प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति और 'नो डिटेंशन पॉलिसी' पर भी सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और समाधान निकालने की अपील की.

 

वहीं छात्र प्रतिनिधि रविंद्र कुमार पासवान ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 10 अगस्त को विधानसभा का विशाल घेराव किया जाएगा. उनका दावा है कि उस दिन राज्य के सभी 24 जिलों से हजारों छात्र रांची पहुंचेंगे और आंदोलन को व्यापक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा.

 

कार्तिक सोरेन ने कहा की आदिवासी छात्र भी इससे पीड़ित है, और आदिवासी छात्रों का भी इस आंदोलन में पूरा समर्थन है. साथ ही कहा की जबतक ये आंदोलन की मांग पूरी नही होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

 

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