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JPSC-JSSC छात्रों का धरना जारी, सरकार पर आंदोलन को बांटने का आरोप, 10 अगस्त को विधानसभा मार्च की चेतावनी

छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि जब बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पिछले 15 दिनों से धरना दे रहे हैं, तब सरकार अलग-अलग छात्र संगठनों से ज्ञापन लेकर आंदोलन को विभाजित करने की कोशिश कर रही है.
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Ranchi :  झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी है. आंदोलन के 15वें दिन छात्रों ने सरकार पर आंदोलन को कमजोर करने और छात्रों को अलग-अलग समूहों में बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र नेताओं पीयूष, कार्तिक सोरेन और शीतल तिर्की ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ छात्रों की पहली दौर की वार्ता हो चुकी है. वार्ता में छात्रों ने अपनी मांगें विस्तार से रखी थीं. इनमें कथित तौर पर दागी परीक्षाओं को रद्द करना, अनियमितताओं की CBI और ED से जांच कराना तथा JPSC-JSSC की पूरी भर्ती व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना शामिल है. छात्रों के अनुसार, सरकार के प्रतिनिधियों ने उनकी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बाद अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है.

 

 

छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि जब बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पिछले 15 दिनों से धरना दे रहे हैं, तब सरकार अलग-अलग छात्र संगठनों से ज्ञापन लेकर आंदोलन को विभाजित करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने NSUI और JMM छात्र मोर्चा समेत कुछ संगठनों का नाम लेते हुए कहा कि इन संगठनों का मौजूदा आंदोलन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा है. छात्रों ने इसे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया.

 

आंदोलनकारियों ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी चिंता जताई. उनके अनुसार आंदोलनकारी राहुल की तबीयत गंभीर रूप से खराब होने के बाद उन्हें सदर अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया है. छात्रों ने दावा किया कि तीन अन्य साथी भी भूख हड़ताल पर हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि आंदोलन के दौरान किसी छात्र की तबीयत बिगड़ने या कोई अप्रिय घटना होने पर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी.

 

छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे केवल 14वीं JPSC परीक्षा रद्द किए जाने के आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे. उनका कहना है कि जिन भर्ती परीक्षाओं में TDPL अथवा अभय कुमार तिवारी की कथित संलिप्तता के आधार पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, उन सभी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए. साथ ही भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग भी छात्रों ने दोहराई है.

 

छात्र नेताओं ने 10 अगस्त को बड़े विधानसभा मार्च की चेतावनी देते हुए दावा किया कि झारखंड के अलग-अलग जिलों से लगभग 5 लाख छात्र रांची पहुंचेंगे. उनके अनुसार, यह मार्च निर्णायक होगा और सरकार से उनकी मांगों पर लिखित एवं आधिकारिक निर्णय की मांग की जाएगी. छात्रों ने कहा कि मार्च का नेतृत्व केवल JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच करेगा और इसमें किसी राजनीतिक दल का बैनर या पोस्टर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

 

छात्रों ने अपने ऊपर किसी राजनीतिक दल का एजेंट होने के आरोपों को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह छात्रों के मुद्दों पर आधारित है और उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है. छात्रों के मुताबिक आंदोलन को शुरुआती दौर में विभिन्न राजनीतिक नेताओं की ओर से नैतिक समर्थन जरूर मिला, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आंदोलन किसी राजनीतिक दल के नियंत्रण में है.

 

छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार की ओर से दूसरे दौर की वार्ता को लेकर उन्हें कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. संभावित बैठक की चर्चा के बावजूद छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर आधिकारिक निर्णय या लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा.

 

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