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JPSC ने हाईकोर्ट को बताया, सिविल जज परीक्षा का नया परिणाम जल्द किया जाएगा जारी

सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा (विज्ञापन संख्या 22/2023) का जल्द ही नया परिणाम जारी किया जाएगा. उत्तर पुस्तिका (answer key) की दोबारा समीक्षा की जा रही है. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड हाईकोर्ट को इसकी जानकारी दी है.
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  • कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने पर प्रार्थियों को सफल घोषित किया जाएगा
  • अवमानना याचिका निष्पादित

Ranchi :  सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा (विज्ञापन संख्या 22/2023) का जल्द ही नया परिणाम जारी किया जाएगा. उत्तर पुस्तिका (answer key) की दोबारा समीक्षा की जा रही है. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड हाईकोर्ट को इसकी जानकारी दी है.  

 

हाईकोर्ट ने JPSC के उक्त परीक्षा से जुड़े संगीता कुमारी, जूली प्रवीण और लक्ष्मी कुमारी की अवमानना मामले में सुनवाई करते हुए याचिका निष्पादित कर दी. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की.  

 

मामले में JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने हाईकोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मामले में JPSC की SLP को खारिज कर दिया गया है. बाद में सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य आदेश के अनुसार उत्तर पुस्तिका (answer key) की दोबारा समीक्षा की प्रक्रिया चल रही है.

 

हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है, जिसके आधार पर जल्द ही नया परिणाम जारी किया जाएगा. नए परिणाम में याचिकाकर्ताओं को EBC-I और BC-II श्रेणी में मानते हुए विचार किया जाएगा.

 

JPSC ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता अपने-अपने वर्ग के कट-ऑफ अंक से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, तो उन्हें सफल घोषित किया जाएगा. हालांकि इस विषय में दायर एक सिविल रिव्यू के अंतिम निर्णय पर भी स्थिति निर्भर करेगी. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता वंदना सिंह एवं अधिवक्ता राजेश कुमार ने पक्ष रखा.

 

क्या है मामला

तीन अभ्यर्थियों संगीता कुमारी, जुली परवीन और लक्ष्मी कुमारी ने अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि अदालत के पूर्व आदेश (24 जून 2025) का पालन नहीं किया गया. उस आदेश में JPSC को निर्देश दिया गया था कि सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा (विज्ञापन संख्या 22/2023)U का परिणाम दोबारा प्रकाशित किया जाए .

 

साथ ही याचिकाकर्ताओं को EBC-I और BC-II श्रेणी के उम्मीदवार के रूप में माना जाए.  बता दें कि जेपीएससी ने इन प्रार्थियों को जनरल केटेगरी का मानते हुए अयोग्य घोषित किया था, जिसके खिलाफ सभी ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी.

 

 

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