Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट में JSSC- CGL (विज्ञापन संख्या 10/2023) सहित अन्य नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है. मामले में प्रार्थी, हस्तक्षेप कर्ता और सरकार की ओर से बहस चल रही है. कोर्ट की प्रथम पाली में सुनवाई जारी रही. अब दोपहर 2:15 बजे फिर से सुनवाई शुरू होगी. वहीं प्राथियों की ओर से बहस पूरी कर ली गयी है. अब सरकार पक्ष की ओर से बहस होना है.
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया गया कि JSSC- CGL परीक्षा में क्वेश्चन लीक का कोई मामला नहीं है. किसी भी परीक्षा सेंटर से क्वेश्चन पेपर लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला. यह गेस क्वेश्चन का मामला है. नेपाल में 28 अभ्यर्थियों को संभावित क्वेश्चन को रटाया गया. इन 28 अभ्यर्थियों में से 10 सफल हुए. इन 10 के रिजल्ट नहीं जारी करने के बारे में हाइकोर्ट ने भी आदेश दिया था, सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है.
कोर्ट के आदेश के अनुसार SIT जांच के अंतिम निर्णय से अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रभावित होगी, ऐसे में सरकार द्वारा JSSC- CGL की पूरी परीक्षा रद्द करना अनुचित है. दो साल से अधिक समय से SIT की जांच चल रही है. मामले में अभी भी अनुसंधान जारी है, आरोप पत्र भी दायर नहीं हुआ है. अभी तक यह पता नहीं है कि इसमें कौन दोषी है और कौन दोषी नहीं है, तो फिर एक साथ कैसे पूरी परीक्षा को सरकार ने रद्द कर दिया. बड़े पैमाने पर परीक्षा में धांधली का कोई प्रमाण जांच एजेंसी को मिला है.
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता श्रेय मिश्रा, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स आदि ने पक्ष रख रहे हैं. राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय पक्ष रख रहे हैं. अदालत इस नियुक्ति को रद्द किये जाने को चुनौती देने वाली आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य सहित अलग-अलग कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.
प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा एवं अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि JSSC - CGL का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से निष्पादित हो चुका है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि गलत और सही का फर्क किया जाए और सारी नियुक्ति क्रिमिनल प्रोस्कयूशन पर निर्धारित रहेगी, फिर इस मामले को दोबारा उठाकर नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है. यह कोर्ट की अवमानना है. सुप्रीम कोर्ट ने इस संदर्भ में दिशा निर्देश भी दे दिया है. सरकार ने केवल आंदोलनकारी छात्रों को संतुष्ट करने के लिए JSSC - CGL की नियुक्ति रद्द की है.
उल्लेखनीय है कि CID जांच में मिले तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिसमें TDPL शामिल रहा है. इसके अलावा वर्ष 2014 से हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितता के मद्देनजर जांच कराने की घोषणा भी की गयी थी.
इन घोषणाओं के मद्देनजर कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने परीक्ष रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और जांच कराने से संबंधित अधिसूचना जारी की है. इसमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 की प्रक्रिया को स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने का उल्लेख किया गया है.
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