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JSSC CGL पेपर लीक प्रकरण : अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा राजभवन,सौंपा ज्ञापन

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा पेपर लीक प्रकरण को लेकर राज्यभर के अभ्यर्थियों में रोष बढ़ता जा रहा है.
 

Ranchi : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा पेपर लीक प्रकरण को लेकर राज्यभर के अभ्यर्थियों में रोष बढ़ता जा रहा है. इसी कड़ी में आज अभ्यर्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल महोदय से राजभवन में भेंट कर इस प्रकरण से संबंधित कई गंभीर मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा.

 

अभ्यर्थियों ने राज्यपाल से मुलाकात के दौरान पेपर लीक मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि इस मामले ने न केवल राज्य की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य को भी प्रभावित किया है.

 

अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें 

तीन प्रमुख बिंदुओं पर राज्यपाल का ध्यान आकर्षित किया

1. JSSC CGL पेपर लीक प्रकरण की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए.
2. व्हिसलब्लोअर अभ्यर्थियों और शिक्षकगणों पर CID द्वारा की जा रही कथित प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न को तत्काल रोका जाए.
3. आयोग की जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जाएं.

इस मामले की सुनवाई 3 नवंबर को की गई थी. जिसका फैसला न्यायालय ने फिलहाल रिजर्व रखा है. अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि आने वाला निर्णय उनके पक्ष में जाएगा.

 

राज्यपाल से मुलाकात में अभ्यर्थियों की भावनाएं


याचिकाकर्ता राजेश प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हम छात्रों ने जो आरोप लगाए थे, वे अब सच साबित हो रहे हैं. लगभग हर जांच एजेंसी ने हमारे दावों को सही माना है. 
जो शिक्षक हमें इस पूरे आंदोलन में मार्गदर्शन दे रहे हैं, उन्हें बार-बार नोटिस भेजा जा रहा है. हमने यह बात महामहिम के समक्ष रखी, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई और हमें कहा कि अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में उचित कार्रवाई करें.

 

राजेश प्रसाद ने आगे बताया कि राज्यपाल महोदय ने आश्वस्त किया है कि न्यायालय के निर्णय में वे अभ्यर्थियों के साथ रहेंगे. हमने CBI जांच की मांग को लेकर रिट दायर की है और हमें भरोसा है कि न्याय मिलेगा. हालांकि, जो भी फैसला आएगा, हम उसका सम्मान करेंगे.

 

अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे उनमें भय का वातावरण बन गया है. उनका कहना है कि कहीं उन्हें पूछताछ के नाम पर जेल न भेज दिया जाए, ठीक वैसे ही जैसे मस्ताना सर को भेजा गया था.अभ्यर्थियों ने राज्यपाल से आग्रह किया कि इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर युवाओं के भविष्य और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को सुरक्षित रखा जाए.

 

 

 

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