New Delhi : इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा फिर चर्चा में हैं. दरअसल यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए लोकसभा द्वारा बनाई गयी तीन सदस्यीय जांच समिति की वैधता को चुनौती दी है. आज मंगलवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस जारी किया है.
यशवंत वर्मा ने अपनी याचिका में याद दिलाते हुए कहा है कि दोनों सदनों में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन यह राज्यसभा में मंजूर नहीं हुआ. फिर भी लोकसभा ने अकेले जांच समिति बनाई, यह गलत है. इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और एजे मसीह की बेंच ने लोकसभा स्पीकर कार्यालय और दोनों सदनों के महासचिवों से जवाब देने को कहा है.
जस्टिस दत्ता ने जवाब मांगते हुए पूछा कि राज्यसभा में प्रस्ताव नामंजूर हुआ फिर भी लोकसभा में समिति बनाई गयी. आश्चर्य व्यक्त किया कि संसद में इतने सारे सांसद और कानूनी विशेषज्ञ मौजूद थे, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया, बता दें कि 14 मार्च को दिल्ली में जज के आधिकारिक आवास के स्टोर रूम में आग लगने के बाद जले हुए नोटों के बंडल मिले थे.
लोकसभा अध्यक्ष ने जज (जांच) कानून 1968 की धारा 3(2) के तहत के जांच पैनल बनाया. याचिका में इसे संविधान के खिलाफ बताया गया है. याचिका में 12 अगस्त 2025 की लोकसभा स्पीकर की कार्रवाई को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की मांग की गयी है.
जस्टिस वर्मा के वकील ने कहा कि जज को हटाने से जुड़े प्रस्ताव लाने से पहले लोकसभा और राज्यसभा दोनों मिलकर जांच समिति बनाये सिर्फ लोकसभा स्पीकर अकेले यह कमेटी न बनाये.
इससे पूर्व तीन हाईकोर्ट जजों की जांच में जस्टिस वर्मा दोषी पाये गये थे उन्हें हटाने की सिफारिश की गयी थी. इसके बाद सरकार ने संसद में महाभियोग प्रस्ताव रखा, जिसे 146 सांसदों के समर्थन के साथ अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया था.
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