New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने आज जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गयी संसदीय समिति की वैधता को चुनौती दी थी.
स्पीकर ने संसदीय समिति जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में अधजले नोटों के मिलने के बाद उनके खिलाफ लाये गये महाभियोग प्रस्ताव के बाद गठित की थी. तीन सदस्यीय समिति में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंदर मोहन और सीनियर एडवोकेट बीवी आचार्य शामिल हैं.
मामला यह है कि मार्च, 2024 में दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर आग लग गयी थी. वहां से जले हुए नोटों के बंडल मिले थे. उस समय तत्कालीन चीफ जस्टिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया था.
दरअसल जस्टिस वर्मा ने समिति के गठन को गलत करार दिया था. अपनी याचिका में दलील दी थी कि उन्हें हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा के उपसभापति द्वारा खारिज कर दिया गया था.
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच ने 8 जनवरी, 2026 को जस्टिस वर्मा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी है.
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