Jamsedpur : जिले के युवा कारोबारी कैरव गांधी के अपहरण मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. कैरव गांधी की सुरक्षित रिहाई के बाद पुलिस ने बिहार में छापेमारी कर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट हो गया है कि अपहरण करने वाला गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था. अपराधियों ने पुलिस की पूछताछ में एक चौंकाने वाला खुलासा भी किया है. सभी ने स्वीकार किया है कि कैरव गांधी को फिरौती की रकम वसूलने के बाद ही रिहा किया गया.
गौरतलब है कि 26 जनवरी की देर रात अपहरणकर्ता कैरव को बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित बरही और चौपारण के बीच एक सुनसान इलाके में छोड़कर फरार हो गए थे. लेकिन पुलिस की पैनी नजर उन पर बनी हुई थी.
गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश जारी
पुलिस जांच में जमशेदपुर के जेम्को निवासी सोनू नामक युवक का नाम प्रमुखता से उभर कर आया है. सोनू फिलहाल फरार है. पुलिस ने उसके ससुराल बिहार में भी दबिश दी, लेकिन वह हाथ नहीं लगा.
पुलिस का मानना है कि सोनू ने ही स्थानीय स्तर पर रेकी कर गिरोह को जानकारी उपलब्ध कराई थी. पुलिस फिलहाल इस गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश कर रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फिरौती के रूप में कितनी रकम दी गई है और इस गिरोह के तार झारखंड और बिहार के किन अन्य बड़े अपराधियों से जुड़े हैं.
बिहार के गया और नालंदा में पुलिस की दबिश
पुलिस की विशेष टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर बिहार के गया और नालंदा जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी की. गया के बुनियादगंज थाना क्षेत्र के सोंधी गांव से उपेंद्र सिंह और अर्जुन सिंह को गिरफ्तार किया गया.
पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर नालंदा के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के पहाड़ीतल गांव में छापा मारा गया और उपेंद्र के रिश्तेदार गुड्डू सिंह को हिरासत में लिया गया. इन तीन मुख्य गिरफ्तारियों के अलावा पुलिस ने पांच अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है, जिनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है.
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान पुलिस ने अपहरण में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो, एक अन्य कार और अवैध हथियार भी बरामद किए हैं.
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