Search

 
 
 

Ranchi News: RU में करम पूर्व संध्या समारोह, मांदर की थाप पर थिरके छात्र

Ranchi News: बंधु तिर्की ने बताया कि करम पूर्व संध्या समारोह की शुरुआत वर्ष 1987 में हुई थी. इसका पहला आयोजन आदिवासी हॉस्टल में किया गया था. इसके बाद रांची विश्वविद्यालय के सभागार में भी आयोजन की परंपरा शुरू हुई.
 
मांदर के थाप पर थिरकते छात्र

Ranchi News: रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में सोमवार को सरना नव युवक संघ की ओर से करम पूर्व संध्या समारोह का आयोजन किया गया. इसमें विश्वविद्यालय,स्कूल और आदिवासी हॉस्टल के हजारों विद्यार्थी शामिल हुए. इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक कार्यकार्ता और बुद्धिजीवी, लेखकों ने भी हिस्सा लिये. करम पूर्व  संध्या समारोह में पांच जनजातिय भाषाओं के विद्यार्थियों ने अपने लोक गीत संगीत और वाद्ययंत्र के प्रस्तुति दी.

इसे भी पढ़ें: 

इस मौके पर सरना फूल पुस्तक का विमोचन और विभिन्न सेवाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगो को भी सम्मानित किया गया.समारोह में आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा और जल-जंगल और जमीन के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया गया. कार्यक्रम में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए. 

 

इस दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि करम पर्व आदिवासी समाज के लिए आस्था, संस्कृति और भाई-बहन के अटूट रिश्ते का पर्व है. यह पर्व समाज में समरसता और आपसी संबंधों को मजबूत करने का संदेश देता है. 

 

उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने जिस उद्देश्य और दृष्टिकोण के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाया, उसे वर्तमान पीढ़ी को भी संरक्षित रखने की जरूरत है. बंधु तिर्की ने बताया कि करम पूर्व संध्या समारोह की शुरुआत वर्ष 1987 में हुई थी. इसका पहला आयोजन आदिवासी हॉस्टल में किया गया था. इसके बाद रांची विश्वविद्यालय के सभागार में भी आयोजन की परंपरा शुरू हुई. करीब 40 वर्षों के सफर में यह आयोजन राजधानी में आदिवासी भाषा और संस्कृति से जुड़े प्रमुख आयोजनों में शामिल हो गया है.

 

समारोह का उद्देश्य आदिवासी भाषा-संस्कृति के संरक्षण के साथ जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा और संवर्धन के प्रति समाज को जागरूक करना है. वक्ताओं ने कहा कि समय के साथ आयोजन के स्वरूप में बदलाव आया है. वर्तमान में डीजे को भी प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन आदिवासी समाज आज भी पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का प्रयास कर रहा है.

 

कार्यक्रम में मुंडारी साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले लोगों को सेवा सम्मान भी प्रदान किया गया. समारोह में डॉ. हरि उरांव, प्रोफेसर सुदेश कुमार साहू, ओपन चांसलर त्रिवेणी नाथ साहू, डीन अर्चना दुबे, बंदे खलखो, रामा खलखो, डॉ. बंदे उरांव समेत अन्य लोग मौजूद थे. 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही