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Ranchi News: मारवाड़ी कॉलेज में करम पूर्व संध्या समारोह का आयोजन

Ranchi News: प्राचार्य ने करम पर्व की वैज्ञानिकता की तुलना जावा से करते हुए इसे प्रकृति से जोड़ने की बात कही. उन्होंने जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विद्यार्थियों को मंच प्रदान करने और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए उनका हौसला बढ़ाया.
 
कॉलेज में करम महोत्सव

Ranchi News: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग, मारवाड़ी कॉलेज, रांची में सोमवार को करम पर्व के अवसर पर ‘करम पूर्व संध्या’ समारोह धूमधाम से आयोजित किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया. उन्होंने झारखंडवासियों को प्रकृति के महान पर्व करम की शुभकामनाएं दीं और करम पर्व की महत्ता पर प्रकाश डाला.

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प्राचार्य ने करम पर्व की वैज्ञानिकता की तुलना जावा से करते हुए इसे प्रकृति से जोड़ने की बात कही. उन्होंने जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विद्यार्थियों को मंच प्रदान करने और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए उनका हौसला बढ़ाया.

 

पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डीएसडब्ल्यू डॉ. वृंदावन महतो ने करम कथा प्रस्तुत की. उन्होंने करमा-धर्मा की कहानी के माध्यम से प्रकृति और मनुष्य के बीच प्रेम और संबंध को अभिव्यक्त किया.

 

विभागाध्यक्ष डॉ. खातिर हेमरोम ने स्वागत भाषण में कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी भाषा, संस्कृति और वेशभूषा को भूलते जा रहे हैं. अपनी मिट्टी से जुड़ने और अपनी जड़ों को पहचानने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि करम की डाली हमें सिखाती है कि जिस तरह करम का पेड़ सीधा खड़ा रहता है, उसी तरह हमें भी जीवन में ईमानदारी के साथ सीधा खड़ा रहना चाहिए. करम पर्व मनाने का अर्थ अपनी करम संस्कृति को जीना है.

 

कार्यक्रम में मुंडारी भाषा विभाग के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया. गीत के माध्यम से करम पर्व के अवसर पर रखे जाने वाले उपवास के महत्व को बताया गया और अतिथियों का स्वागत किया गया. कुड़ुख भाषा विभाग के विद्यार्थियों ने करम नृत्य प्रस्तुत कर प्रकृति के प्रति प्रेम का संदेश दिया. उन्होंने करम वृक्ष की तरह जीवन में भी हरियाली बनाए रखने का संदेश दिया.

 

नागपुरी भाषा विभाग के विद्यार्थियों ने नृत्य-गीत के माध्यम से प्रकृति से जुड़े रहने का आह्वान किया. उन्होंने काश के खिले फूलों की तरह जीवन के भी फलने-फूलने का संदेश दिया.

 

नवनियुक्त प्रोफेसर डॉ. विष्णु पद महतो ने कुरमाली करम गीत प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. गीत के माध्यम से उन्होंने करम पर्व में बहनों के उपवास के महत्व और उनके सुख-समृद्धि की कामना को सामने रखा. साथ ही प्रकृति की हरियाली की तरह जीवन को भी हरा-भरा बनाए रखने का संदेश दिया.

 

कुड़ुख की प्राध्यापिका डॉ. सुमंति तिर्की ने कुड़ुख करम गीत प्रस्तुत किया. उन्होंने गीत के माध्यम से प्रकृति और मानव जीवन के संबंध को दर्शाया. उन्होंने बताया कि प्रकृति ने मनुष्य को सुंदर जीवन जीने के लिए अनेक साधन दिए हैं. करम की डाली की तरह जीवन के भी विस्तार और प्रकृति को हरा-भरा बनाए रखने का संदेश दिया.

 

कार्यक्रम के दौरान मुंडारी विद्यार्थियों ने करम लोक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया. इसके बाद कॉलेज के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी भी मंच पर पहुंचे और विद्यार्थियों के साथ सामूहिक नृत्य किया. सभी ने करम पूर्व संध्या का आनंद लिया और नृत्य-गायन के माध्यम से करम राजा का स्वागत किया.

 

मंच संचालन कुरमाली के सहायक प्राध्यापक डॉ. अशोक कुमार महतो ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अवध बिहारी महतो ने किया. कार्यक्रम में पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. महेश्वर सारंगी, डॉ. बहालेन होरो, संगीता तिग्गा, जुरा होरो, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राहुल कुमार, जयप्रकाश रजक, संतोष रजवार, शिवनंदन समेत अन्य शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे.

 

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