Ranchi News: राजधानी सहित पूरे राज्य में प्रकृति पर्व करम पूजा धूमधाम से मनाई गई. शाम सात बजे अखाड़ों मे पूजा अर्चना की गई है. पाहन द्वारा करम डाली की स्थापना की गई. इसके बाद उपवास किए बहने पारंपरिक वेश भूषा में सजधजकर अखड़ा पहुंचे. सभी अपने साथ में थाली लिये हुए थे. जिसमें पीठा, फल, टिका सिंदुर, अगरबती, अरवा चावल लिए हुए अखड़ा में बैठे. इसके बाद पाहन द्वारा करमा धरमा की कथा सुनाई गई.
बहनों ने करम देवता से अपने भाई की लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना की. युवा और बच्चे पारंपरिक वाद्ययंत्र के साथ सामूहिक नृत्य किए, जो देर रात चला. इसके अलावा मुख्य अतिथियों का स्वागत सरना गमछा देकर किया गया.
इसे भी पढ़ें:
करमा उत्सव के मौके पर सभी अखाड़ों को रंग बिरंगे फूल मालाओं से सजाया गया. श्रद्धालुओ के आगमन के लिए सभी एप्रोच मार्गो को लाईटों से जगमगाए गए. उपासक को करम अखड़ा तक पहुंचने के लिए मेट बिछाई गई. ताकि श्रद्धालुओ को आने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसका भी ख्याल रखा गया. इसके अलावा बरसात का मौसम देखते हुए अखाड़ा को वाटर प्रुफ बनाया गया.
करमटोली चौक स्थित छोटानागपुर ब्लू क्लब करम अखडा के लिए पांच करम डालियां लाई गई. इनमें एक डाली देवी मंडप और दूसरी तालाब में अर्पित की गई. तीन डालियों को वाद्ययंत्रों के साथ नाचते-गाते अखाड़े में लाया गया.
अखड़ा में तीन बार परिक्रमा के बाद पूजा की प्रक्रिया पूरी की गई. पाहन कुंवर हेमरोम और सहयोगी सुनील खलखो पूजा स्थल को गोबर से लीपकर शुद्धिकरण किये. इसके बाद करम डाली की स्थापना की गई.
पूजा के दौरान रंगुवा मुर्गे की बलि दी गई. कथावाचक डॉ. राजेश कुजूर और मुकेश खलखो करम कथा सुनाये. इस मौके पर अध्यक्ष राजेश कुजूर, राजकुमार लोहिया, विजय तिर्की, डॉ. रविंद्र नाथ भगत, पूर्व वीसी विनोबा भावे विश्वविद्यालय शामिल हुए.
सरना समिति हरमू अखड़ा में पाहन बाहा तिग्गा पूजा कराए. उनके सहयोगी दशरथ बेग और दुगा गाड़ी भी मौजूद रहे. हरमू नदी से करम डाली को वाद्ययंत्रों के साथ अखाड़े में लाया जाएगा. 23 सितंबर की शाम छह बजे बच्चों के लिए नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी. इसमें भाग लेने वाले बच्चों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

