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साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ी कविता देवी, हालात से हारने के बजाय हौसलों से लिख रही नयी कहानी

Ramgarh News :  कविता देवी इन दिनों होमगार्ड बहाली के ट्रायल में अपने भविष्य को संवारने की कोशिश कर रही हैं. खास बात यह है कि वह तपती धूप में साड़ी पहनकर नंगे पांव रेतीली जमीन पर दौड़ लगाते हुए बहाली की परीक्षा दे रही हैं. उनकी यह तस्वीर और संघर्ष की कहानी सोशल मीडिया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.
 
नंगे पांव दौड़ी कविता देवी

Ramgarh News :  आज के दौर में जब लोग अपनी फिटनेस और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए तमाम सुविधाओं का सहारा लेते हैं, वहीं रामगढ़ जिले के दुलमी की रहने वाली कविता देवी ने संघर्ष, साहस और जज्बे की ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है.

 

कविता देवी इन दिनों होमगार्ड बहाली के ट्रायल में अपने भविष्य को संवारने की कोशिश कर रही हैं. खास बात यह है कि वह तपती धूप में साड़ी पहनकर नंगे पांव रेतीली जमीन पर दौड़ लगाते हुए बहाली की परीक्षा दे रही हैं. उनकी यह तस्वीर और संघर्ष की कहानी सोशल मीडिया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.

 

  

 

कविता का जीवन पिछले कुछ वर्षों में लगातार कठिन परिस्थितियों से गुजरा है. उनके पति गुजरात में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे. लंबी बीमारी के बाद पति का निधन हो गया.

 


परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही समय बाद उनके भैंसुर का भी निधन हो गया. इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा कविता देवी के कंधों पर आ गया.

 

 
ईंट-भट्ठे में मजदूरी कर पाल रही हैं परिवार

पति की मौत के बाद कविता ने परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय मेहनत को अपना सहारा बनाया. वह ईंट-भट्ठे में मजदूरी कर अपने दो बच्चों और सास-ससुर का किसी तरह पालन-पोषण कर रही हैं. रोजमर्रा की कठिन जिंदगी के बीच उन्होंने अपने लिए एक नया लक्ष्य तय किया—होमगार्ड बनकर अपने परिवार को बेहतर भविष्य देना.

 

न तो उनके पास महंगे स्पोर्ट्स शूज हैं, न ट्रैक सूट और न ही किसी विशेष प्रशिक्षण की सुविधा. लेकिन उनके पास है तो सिर्फ हिम्मत, मेहनत और कुछ बेहतर कर गुजरने का जज्बा.

 

 

 सुविधाएं नहीं, हौसला बना सहारा

आज जहां लोग जिम जाने के लिए अलग कपड़े और दौड़ने के लिए महंगे जूते खरीदते हैं, वहीं कविता देवी साड़ी में, नंगे पांव और रेतीली जमीन पर दौड़ लगाकर अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं.

 

उनकी यह तस्वीर केवल एक महिला के दौड़ने की तस्वीर नहीं है, बल्कि यह संघर्ष के बीच उम्मीद, मजबूरी के बीच आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने की कहानी है.

 

कविता देवी की कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इंसान के भीतर आगे बढ़ने का हौसला हो तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं.

 

कविता देवी को देखकर यही कहा जा सकता है—मंजिल शायद अभी दूर है, रास्ता कठिन है, लेकिन हौसले बुलंद हैं. उनकी मेहनत और जज्बे को सलाम है. उम्मीद है कि उनकी यह कोशिश रंग लाएगी और होमगार्ड बहाली में उन्हें सफलता मिलेगी.

 

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