- अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हुई चर्चा
New Delhi : मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन के नेतृत्व में झारखंड से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली स्थित ईरान कल्चर हाउस में ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अयातुल्लाह अली खामेनई के प्रतिनिधि डॉ. माजिद हकीम इलाही से मुलाक़ात की.

यह मुलाकात औपचारिकता से आगे बढ़कर शोक संवेदना, आपसी संबंधों की मजबूती और वैश्विक हालात पर गंभीर चर्चा का माध्यम बनी.प्रतिनिधिमंडल ने शहीद नेता और मासूम बच्चियों की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन (इमाम-ए-जुमा, रांची) ने मिल्लत-ए-इस्लामिया झारखंड की ओर से ताज़ियत-नामा पेश कर संवेदना व्यक्त की.
इस दौरान छात्र नेता अफ़ज़ल दुर्रानी ने भी डॉ. इलाही से मुलाक़ात कर शोक जताया और भारत-ईरान संबंधों को ऐतिहासिक, मजबूत और आपसी सम्मान पर आधारित बताया. उन्होंने कहा कि एक वर्ष पूर्व ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की विमान दुर्घटना में मृत्यु पर भारत में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था और राष्ट्रीय ध्वज झुकाकर सम्मान दिया गया था.

अफ़ज़ल दुर्रानी ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी शख्सियत की शहादत पर चुप्पी कई सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब भारत के प्रधानमंत्री स्वयं उनसे मिलने ईरान गए थे.मुलाक़ात के दौरान अफ़ज़ल दुर्रानी ने डॉ. इलाही को एक विशेष तस्वीर भेंट की, जिसमें अयातुल्लाह अली खामेनई और उनके सुपुत्र मोजतबा खामेनई की तस्वीर शामिल थी. इसे आपसी सम्मान और सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती का प्रतीक बताया गया.
डॉ. माजिद हकीम इलाही ने अपने संबोधन में भारत की संस्कृति, भाईचारे और इंसानियत की सराहना करते हुए कहा कि अयातुल्लाह खामेनई की शहादत से पूरी इंसानियत प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा मज़लूमों के साथ खड़ा रहा है और फ़िलिस्तीन व ग़ाज़ा के मुद्दे पर अपनी मजबूत आवाज़ उठाता रहा है.
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली स्थित ईरान दूतावास का दौरा किया, जहां उनकी मुलाक़ात ईरानी राजनयिक डॉ. मोहम्मद फतेह अली से हुई. इस दौरान भारत-ईरान संबंधों, वैश्विक परिस्थितियों और मुस्लिम उम्मत से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई.

डॉ. फतेह अली ने भारतीय जनता के समर्थन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत और ईरान के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक रूप से भी गहरे जुड़े हुए हैं.इस प्रतिनिधिमंडल में सैयद शारिख़ रिज़वी, समर अली, असफ़र नकवी, सैयद जावेद हैदर और मौलाना सैयद सादिक हुसैन हुसैनी सहित कई प्रमुख लोग शामिल थे.अंत में एआईएसएफ के नेता अफ़ज़ल दुर्रानी ने ईरान के रुख़ की सराहना करते हुए एकजुटता, भाईचारे और इंसानियत के साथ खड़े रहने का संदेश दिया.
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