Lucknow : लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के अवैध धर्मांतरण मामले में बड़ी खबर आयी है, पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक को गिरफ्तार कर लिया गया है. वह 16 दिनों से भागा हुआ था. प्रशासन ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था.
अहम बात यह है कि पुलिस आरोपी रमीज के 70 वर्षीय पिता सलीमुद्दीन और माता खतीजा को भी गिरफ्तार कर चुकी है. इससे पहले पुलिस डॉक्टर रमीज के लखनऊ और पीलीभीत स्थित घरों की कुर्की की कर चुकी है. पुलिस ने बताया कि आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक कोर्ट में सरेंडर करने की जुगत में थे, लेकिन पुलिस ने उसे पहले ही धर दबोचा.
मामला यह है कि पीड़िता केजीएमयू से एमडी पैथोलॉजी कर रही है. आरोपी डॉक्टर पैथोलॉजी विभाग में सेकंड ईयर का जूनियर रेजिडेंट और उसका सीनियर है. 17 दिसंबर को पीड़िता ने मानसिक प्रताड़ना के कारण दवा का ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास किया.
उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया. परिजन जब वहां पहुंचे तो लव जिहाद और अवैध धर्मांतरण के लिए दबाव डाले जाने का मामला सामने आया. इसके बाद मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल व राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज की गयी
इस मामले में विवि ने कमेटी(विशाखा) का गठन किया था. कमेटी ने रेजिडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक को दोषी करार दिया. कमेटी की जांच में सामने आया कि पीडिता के फिजिकल, इमोशनल और मेंटल हरासमेंट के आरोप सही हैं. इसके बाद आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया है. उसके बाद वह फरार हो गया.
विशाखा कमेटी की चेयरमैन डॉ मोनिका रानी ने कहा कि जुलाई 2025 में पीड़िता को यह पता नहीं था कि रमीज पहले से शादीशुदा है. सितंबर 2025 में जब उसे यह जानकारी मिल गयी तो उसने अलग होने का निर्णय लिया, लेकिन आरोपी ने शादी कने का झांसा देकर मानसिक रूप से प्रताडित किया. वह उसे ब्लैकमेल करता रहा.
आरोप है कि उसकी काजी के माध्यम से शादी भी कराई गयी. विवि के मीडिया प्रभारी प्रो केके सिंह ने कहा कि इस पूरे मामले में धर्मांतरण से जुड़े आरोपों की पुलिस जांच भी जारी है.
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