Ranchi : लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 22 मार्च को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया है. इसके अगले दिन खरना होता है. जिसे लोहंडा भी कहा जाता है. खरना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस बार खरना आज यानी 23 मार्च को है.
इस दिन सूर्योदय सुबह 05 बजकर 49 मिनट पर है और सूर्यास्त शाम को 06 बजकर 01 मिनट पर होगा. खरना के बाद तीसरे यानी षष्ठी तिथि को अस्ताचलगामी और चौथे दिन यानी सप्तमी तिथि को उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जायेगा. इसके बाद पारण के साथ चारदिवसीय महापर्व का समापन हो जायेगा.
व्रती तन-मन का करती हैं शुद्धिकरण
छठ महापर्व में खरना का खास महत्व है. इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा करने के बाद प्रसाद ग्रहण करती हैं. इसके साथ ही तन और मन का शुद्धिकरण किया जाता है.
खरना के दिन बनता है खीर
खरना के दिन प्रसाद के रूप में गुड़ और चावल से बनी खीर तैयार की जाती है, जिसमें शुद्धता का खास ख्याल रखा जाता है. इसके अलावा केला, रोटी, पूरी, गुड़ से बनी पूरियां और अन्य पारंपरिक मिठाइयां भी चढ़ाई जाती हैं. छठी मईया को भोग लगाने के बाद ही व्रती प्रसाद ग्रहण करती हैं.
नये मिट्टी के चूल्हे व आम की लकड़ी में बनता है प्रसाद
परंपरा के अनुसार, खरना का प्रसाद नए मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया जाता है. हालांकि अब समय के साथ गैस चूल्हे का उपयोग भी होने लगा है. फिर भी शुद्धता और नियमों का पालन जरूरी माना जाता है.
खरना का प्रसाद ग्रहण करने के ये हैं नियम
खरना प्रसाद ग्रहण करने के दौरान घर में शांति बनाए रखना आवश्यक होता है. मान्यता है कि अगर उस समय शोर-शराबा हो जाए तो व्रती प्रसाद लेना बंद कर देती हैं. परिवार के अन्य सदस्य भी व्रती के प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही उसे ग्रहण करते हैं.
छठ महापर्व चार दिनों का त्योहार
चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में तीसरे दिन यानी 24 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि चौथे दिन 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा. इसके बाद पारण के साथ इस पवित्र पर्व का समापन होगा.
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