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किरीबुरु : सरकार के करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सारंडा के वनवासियों को मिल रहा शून्य लाभ

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Kiriburu (Shailesh Singh) : सरकार की विफलताओं को दिखाते सारंडा के तीन प्रमुख दर्शनीय स्थलों में दिघा का इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट सेंटर (आईडीसी), बाईहातु व दोदारी का आसन्न ग्रामीण जलापूर्ति योजना (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) व छोटानागरा के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं. ऐसे तो सारंडा 700 पहाड़ियों की घाटी, साल पेड़ों की विशाल वन श्रृंखला, प्राकृतिक झरने व नदी-नालें, सन राइज व सन सेट, प्राकृतिक खूबसूरती, लौह व मैंगनीज अयस्क रूपी खनिज संपदा, आदिवासियों की कला-संस्कृति व पर्यावरण प्रेम, हाथियों व अन्य वन्य प्राणियों की शरणस्थली आदि के लिये जाना जाता है. इसे भी पढ़े : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-on-july-20-the-gram-sabha-will-conduct-malaria-awareness-campaign/">किरीबुरु

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कुछ बांट रहे बीमारी तो कुछ ने केवल कर रखा है वन भूमि को कब्जा

पर्यटक भी इन्हीं खूबसूरती को देखने सारंडा आते हैं. लेकिन शायद अब पर्यटक इन खूबसूरत नजारों के साथ-साथ दिघा का आईडीसी सेंटर, छोटानागरा का सरकारी अस्पताल व बाईहातु व दोदारी का जलमीनार भी देखने विशेष रूप से पहुंचे. क्योंकि केन्द्र व राज्य सरकार ने एसिया प्रसिद्ध सारंडा जंगल व यहां की ऐतिहासिक प्राकृतिक खूबसूरती को बचाने व इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए भले ही आज तक कोई कार्य न किया हो. लेकिन उक्त तीनों भवनों अथवा ढांचा का निर्माण कर करोड़ों रुपये जरूर खर्च किए हैं. हालांकि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सारंडा के वनवासियों को इसका लाभ शून्य मिल रहा है. यह भी कह सकते हैं कि कुछ बीमारी बांट रहा है तो कुछ वन भूमि को कब्जा कर रखा है. इसे भी पढ़े : देवघर">https://lagatar.in/201503-devotees-performed-jalabhishek-in-deoghar-baba-nagari/">देवघर

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5.40 करोड़ रुपये की लागत से बने आईडीसी से ग्रामीणों को नहीं मिल रही सुविधा

[caption id="attachment_362370" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/idc-centre.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> दिघा का आईडीसी सेंटर.[/caption] वर्ष 2011 में पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने सारंडा के दिघा गांव में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के माध्यम से लगभग 5.40 करोड़ रुपये की लागत से 26,000 वर्ग फुट क्षेत्र में (विभिन्न विभागों के 26 कमरा) आईडीसी सेंटर का निर्माण करवाया था. यह सारंडा के लिये यह ऐतिहासिक व अजुबा था. आईडीसी के निर्माण का मुख्य उद्देश्य दिघा पंचायत के ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं जैसे बाजार परिसर, राशन की दुकान, बैंक, वन कार्यालय, कृषि कार्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी, प्रज्ञा केन्द्र, सामुदायिक भवन, सामुदायिक रसोई, विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय व आवास की सुविधा आदि उपलब्ध कराना था. जिससे दिघा पंचायत के ग्रामीणों को किसी भी कार्य हेतु प्रखंड, अनुमंडल अथवा जिला कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पडे़. सारी सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध हो जाये व सप्ताह में एक दिन सभी विभागों के अधिकारी यहां बैठकर जनता की समस्याओं का समाधान कर सके. सरकार द्वारा यह एक बेहतर प्रयास था. ऐसे 10 आईडीसी सारंडा के विभिन्न पंचायतों में बनाए जाने चाहिए थे. लेकिन करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सारंडा के ग्रामीणों को इसका लाभ शून्य मिला. इसलिए नकारात्मक नजरिये से यह सारंडा का ऐतिहासिक भवन बन गया है. इसे भी पढ़े : हिंदुओं">https://lagatar.in/on-the-demand-of-minority-status-for-hindus-the-sc-said-it-should-be-determined-state-wise-told-the-petitioner-set-a-concrete-example/">हिंदुओं

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जलापूर्ति योजना से केवल मिल रहा दूषित पानी

वहीं, बाईहातु आसन्न ग्रामीण जलापूर्ति योजना पर लगभग आठ करोड़ रुपये खर्च कर छोटानागरा पंचायत के 10 गांवों में व दोदारी आसन्न जलापूर्ति योजना पर लगभग 14.38 करोड़ रुपये खर्च कर गंगदा पंचायत के 14 गांवों में घर-घर शुद्ध पेयजल आपूर्ति करना था. लेकिन इस योजना के तहत ग्रामीणों को कोयना नदी की लाल व दूषित पानी बिना फिल्टर किये ही आपूर्ति की जा रही है. ऐसे पानी को पीकर ग्रामीण निरंतर बीमार हो कर मर रहे हैं. नाकारात्मक नजरिये से यह भी सारंडा का दर्शनीय चीज हो गया है. इसे भी पढ़े : कोयला">https://lagatar.in/dhanbad-police-arrested-the-manager-rai-who-blackmailed-the-coal-trader/">कोयला

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छोटानागरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तो बना लेकिन आज तक मरीजों का इलाज नहीं हुआ प्रारंभ 

[caption id="attachment_362371" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/chhotanagra-phc.png"

alt="" width="600" height="400" /> छोटानागरा का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र.[/caption] कई ठेकेदार बदलने के बाद वर्ष 2021 में अंततः बनकर तैयार हुआ छोटानागरा का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, जहां आज तक सारंडा के मरीजों का इलाज प्रारंभ नहीं हुआ है. ऐसे तो यह 25 बेड क्षमता का अस्पताल बनना था, लेकिन चिकित्सकों व तमाम प्रकार के संसाधनों के अभाव में इसे मात्र छह बेड क्षमता का किया गया है. दुःख की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस नए भवन को अब तक अधिग्रहण नहीं कर पाई है. इसका मुख्य कारण यह है कि अधिग्रहण करने के बाद यहां डॉक्टर व अन्य स्टाफ उपलब्ध कराना पडे़गा. लेकिन विभाग के पास डॉक्टर व स्टाफ नहीं है. इस लिये यह भवन भी सारंडा वासियों के लिये अनुपयोगी साबित हो रहा है. नकारात्मक नजरिये से यह भी सारंडा का दर्शनीय भवन बन गया है. ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि उक्त भवनों पर सरकार व जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये बर्बाद हो गये हैं, लेकिन इसका लाभ जनता को अब तक शून्य मिला. इसे भी पढ़े : अरुणाचल">https://lagatar.in/arunachal-pradesh-19-workers-engaged-in-construction-work-on-china-border-killed-feared-drowning-in-kumi-river/">अरुणाचल

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