- इसी गांव के नाम से खोला गया था विद्यालय
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2005 में 85 बच्चे पढ़ते थे स्कूल में
वर्ष 2005 से पूर्व थोलकोबाद स्थित अनुसूचित जनजाति आवासीय कैम्प विद्यालय में लगभग 85 बच्चे पढ़ते थे. बच्चे व उनके परिवार खुशहाल थे. वर्ष 2001 में सारंडा में नक्सलियों का आगमन एवं उनके द्वारा थोलकोबाद को अपना मुख्यालय बनाने के बाद से ही मानो इस गांव समेत पूरे सारंडा जंगल को किसी की नजर लग गई. इसके बाद पुलिस व नक्सलियों के बीच सह-मात का खेल प्रारम्भ हुआ. दर्जनों जवान शहीद हुये. सभी तरफ नक्सलियों का खौफ कायम था. पुलिस नक्सलियों की खोज में जाती तो थोलकोबाद के इस विद्यालय में ही अपना आशियाना बनाती और वापस लौट आती. इससे नाराज नक्सलियों ने वर्ष 2005 में थोलकोबाद के ग्रामीणों को इकठ्ठा कर आवासीय विद्यालय के सारे बच्चों व शिक्षकों को बाहर निकाल दिया. इसके बाद बच्चों के सामने ही आइइडी लगाकर पूरे स्कूल भवन को उड़ा दिया. स्कूल उड़ने के साथ ही बच्चों की शिक्षा, सपने व भविष्य अंधकारमय हो गया. कई वर्षों तक बच्चे अपने-अपने घर मे रहे. लेकिन बाद में इस स्कूल को मनोहरपुर में स्थानान्तरित कर अनुसूचित जनजाति आवासीय विद्यालय, थोलकोबाद, कैम्प मनोहरपुर से संचालित कर नामांकित सारे बच्चों को वहां ले जाया गया. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-dalsa-launched-drug-de-addiction-campaign-in-ichagarh-area/">चांडिल: डालसा ने ईचागढ़ क्षेत्र में चलाया नशा मुक्ति अभियान
नामांकन शुरू होने की कोई जानकारी नहीं दी गई
थोलकोबाद निवासी बिमल होनहागा, गुमिदा होनहागा व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि आज हालात यह है कि हमारे गांव के नाम से उक्त आवासीय विद्यालय है, लेकिन थोलकोबाद एवं आसपास के गांवों के बच्चों का उसमें नामांकन नहीं हो रहा है. गांव के कई बच्चों का नामांकन इस स्कूल में कराना था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने नामांकन प्रारम्भ होने संबंधी कोई जानकारी नहीं दी. बाद में पता करने पर बताया कि इस स्कूल में नामांकन की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है. स्कूल में अब सीट खाली नहीं है. ऐसे में हमारे गांव के गरीब बच्चे कहां जायें. ग्रामीणों ने सरकार व शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस स्कूल को पहले की तरह हमारे गांव थोलकोबाद में लाया जाये. इसे भी पढ़ें : नेहरू">https://lagatar.in/nehru-four-generations-of-the-gandhi-family-and-me/">नेहरू– गांधी परिवार की चार पीढ़ियां और मैं
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