Koderma: तिलैया थाना पुलिस की कार्यशैली को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. आरोप है कि जिस नाबालिग लड़की के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं था, उसे देर रात घर से उठाकर थाना लाया गया, पूरी रात हाजत में रखा गया और बिना खाना-पानी दिए अगले दिन न्यायिक हिरासत बाल सुधार गृह में भेज दिया गया. वहीं, दूसरी ओर पॉक्सो जैसे गंभीर मामले में नामजद आरोपी को थाना में घंटों बैठाकर चाय-बिस्कुट खिलाने के बाद छोड़ देने का आरोप लगा है.
परिजनों के मुताबिक 29 मई की रात पुलिस नाबालिग लड़की को उसके घर से उठाकर थाना ले आई. आरोप है कि पूरी रात उसे हाजत में रखा गया. इस दौरान न तो खाना दिया गया और न ही पीने के लिए पानी. सुबह जब परिजन थाना पहुंचे तो उन्हें बेटी से मिलने तक नहीं दिया गया. परिवार का कहना है कि लड़की लगातार खुद को नाबालिग बताती रही, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई.
अगले दिन पुलिस लड़की को मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंची और वहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया. परिजनों का आरोप है कि उम्र प्रमाण पत्र दिखाने की कोशिश भी की गई, लेकिन तब तक पुलिस कार्रवाई पूरी कर चुकी थी.
मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब लड़की की मां की शिकायत पर थाना में पॉक्सो के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज हुई. आरोप है कि गंभीर धाराओं में केस दर्ज होने के बावजूद आरोपी सचिन कुमार भदानी को गिरफ्तार नहीं किया गया. परिवार का कहना है कि आरोपी को थाना में आराम से बैठाकर चाय-बिस्कुट दिया गया और देर शाम उसे घर जाने दिया गया.
घटना के बाद तिलैया थाना पुलिस की कार्रवाई को लेकर इलाके में नाराजगी बढ़ गई है. एक तरफ बिना केस नाबालिग को रातभर हाजत में रखने और दूसरी तरफ पॉक्सो आरोपी को राहत देने के आरोपों ने पुलिस की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
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