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कोल्हान विश्वविद्यालय : पीएचडी डिग्री की आस लिए चल बसी कैंसर पीड़ित शोधार्थी

  • जुलाई 2016 में हुई थी प्रवेश परीक्षा, कोर्स वर्क 2018 और रजिस्ट्रेशन 2019 में हुआ
  • आठ साल में भी पीएचडी की उपाधि नहीं दे सका विश्वविद्यालय
  • 16 जनवरी 2024 को शोधार्थी की हो गई मौत
Jamshedpur (Anand Mishra) : कोल्हान विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले शोधार्थियों की क्या स्थिति है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी समय से डिग्री प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है. इसका उदाहरण विश्वविद्यालय की एक ऐसी शोधार्थी रही है, जो कैंसर पीड़ित थी. चौथे चरण के कैंसर से जूझ रही इस शोधार्थी की अंतिम इच्छा थी कि वह अपने हाथों से पीएचडी की डिग्री प्राप्त करे. बार-बार गुहार लगाने के बाद भी यूनिवर्सिटी कॉमर्स विभाग के डीन व अन्य पदाधिकारियों की लेट-लतीफी और उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण उस शोधार्थी की अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकी और 16 जनवरी 2024 को अपने इस सपने को अधूरा छोड़ वह चल बसी. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-cm-gave-the-basic-mantra-of-victory-to-the-booth-committee-members/">आदित्यपुर

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बीमारी की जानकारी के बाद भी उपेक्षा

शोधार्थी का नाम नहीं छापने की शर्त पर परिजनों ने बताया यदि विश्वविद्यालय प्रशासन समय से सारी प्रक्रिया पूरी करता, तो मृतका का सपना पूरा हो जाता. उन्होंने विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग के डीन समेत अन्य अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेवार बताया. मृतका ने विश्वविद्यालय को लिखित तौर पर अपने कैंसर पीड़ित होने की जानकारी देते हुए पीएचडी की उपाधि प्रदान करने की गुहार लगायी थी. इसे भी पढ़ें : केजरीवाल">https://lagatar.in/hearing-on-april-15-in-the-supreme-court-on-the-petition-challenging-kejriwals-arrest-and-remand/">केजरीवाल

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डीन पर आरोप

परिजनों ने बताया कि नवंबर 2023 में थिसिस पूरा करने के साथ ही सभी आवश्यक प्रक्रियाएं मृतका ने पूरी कर ली थी. अपने स्वास्थ्य की स्थिति, उपाधि के लिए आवश्यक सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी विश्वविद्यालय की ओर से परेशान किया जाता रहा. उन्होंने विभागीय डीन पर हठधर्मिता का आरोप लगाया है. बताया गया है कि बार-बार कहने के बाद भी वे जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज से विश्वविद्यालय नहीं गये. वे वर्कर्स कॉलेज में सेवा दे रहे हैं, जबकि उन्हें विश्वविद्यालय के पीजी डिपार्टमेंट में होना चाहिए था. बता दें कि नवंबर 2023 में उसने जो फाइल विश्वविद्यालय में जमा की थी, उसके 89 और 90 नंबर पेज में सर्टिफिकेट नहीं होने का हवाला देते हुए फाइल लौटा दी गयी. इसके बाद पुनः प्रक्रिया पूरी की गयी. इसके बाद भी विश्वविद्यालय में फाइल अभी धूल फांक रही है. इस वजह से समय रहते शोधार्थी का वाइवा भी नहीं हो सका. इसे भी पढ़ें : 50">https://lagatar.in/inflation-and-unemployment-issue-for-50-percent-people/">50

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अधिसूचना के विपरीत कार्य कर रहे डीन

विश्वविद्यालय के डीन अधिसूचना के विपरीत जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज में भी सेवा दे रहे हैं. हालांकि उनका कहना है कि विश्वविद्यालय के निर्देश के अनुसार वे सप्ताह में तीन दिन कॉलेज और तीन दिन विश्वविद्यालय में सेवा देते हैं. जबकि, उन्हें डीन नियुक्त किये जाने संबंधी विश्वविद्यालय की अधिसूचना में तीन दिन कॉलेज और तीन दिन विश्वविद्यालय में योगदान करने से संबंधित कोई उल्लेख नहीं है. इसका खामियाजा शोधार्थियों को भुगतना पड़ रहा है. आरोप यह भी है कि विश्वविद्यालय जाने के लिए शोधार्थियों से साधन तक की मांग की जाती है. हालांकि इस संबंध में पूछने पर डीन ने इन्कार किया. इसे भी पढ़ें : Robert">https://lagatar.in/robert-t-kiyosaki-warned-stocks-bonds-real-estate-are-going-to-crash-if-you-want-to-save-yourself-buy-gold-silver-and-bitcoin/">Robert

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अब तो उपाधि देना मुश्किल

कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ राजेंद्र भारती ने कहा कि संबंधित शोधार्थी की उपाधि को लेकर जरूरी प्रक्रिया तो पूरी कर ली गयी है, लेकिन अब उपाधि प्रदान करने में बाधा है. उन्होंने बताया कि चूंकि शोधार्थी अब दुनिया में नहीं है, इस वजह से उसका वाइवा नहीं हो सकता. अतः अब पीएचडी की उपाधि प्रदान करना संभव नहीं है. डीन से संबंधित सवाल पर उन्होंने बताया कि यह सही है कि अधिसूचना में सप्ताह में तीन दिन कॉलेज और तीन दिन यूनिवर्सिटी में योगदान देने का कोई निर्देश नहीं है. लेकिन शिक्षकों की कमी को देखते हुए ऐसा करना पड़ता है. इसे भी पढ़ें : 2014">https://lagatar.in/there-has-been-a-change-in-the-countrys-foreign-policy-since-2014-s-jaishankar/">2014

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