Ramgarh News: पतरातू के हेसला में जमीन का विवाद एक बार फिर चर्चा में है. झारखंड हाईकोर्ट के 31 अगस्त के फैसले के बाद रैयतों ने इसे अपने लंबे संघर्ष से जोड़कर देखा है. रविवार को हेसला पंचायत भवन में ग्रामीणों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. रैयत ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से जमीन अधिग्रहण से जुड़े कई तथ्य स्पष्ट हुए हैं. इसके बाद ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई.
रैयतों के अनुसार, हेसला मौजा में सिर्फ 12.59 एकड़ जमीन के अधिग्रहण किया गया था. इसके अलावा जमीन का विधिवत अधिग्रहण नहीं हुआ. ऐसी जमीन पर मूल रैयतों का अधिकार आज भी है.
इसे भी पढ़ें:
ग्रामीणों ने कहा कि पतरातू थर्मल पावर स्टेशन की स्थापना के समय बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए थे. यह प्रक्रिया 1960-61 के आसपास शुरू हुई थी. रैयतों का आरोप है कि कई परिवारों की जमीन बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया के कब्जे में ले ली गई. इससे ग्रामीणों को अपने घर और जमीन से दूर होना पड़ा. कई परिवारों को विस्थापित होना पड़ा.
ग्रमीणो के अनुसार हेसला की जमीन जियाडा को हस्तांतरित की गई. हाल के दिनों में जमीन पर प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में कुछ घरों पर बुलडोजर चलाया गया. ग्रामीणों ने कार्रवाई के दौरान लंबित न्यायिक मामले का हवाला देते हुए विरोध किया था. उनका कहना है कि इसके बावजूद कार्रवाई की गई.
विस्थापित-प्रभावित संघर्ष मोर्चा ने कहा कि पीटीपीएस की स्थापना से करीब 25 गांव प्रभावित हुए. हजारों किसान और रैयत इसकी चपेट में आए. मोर्चा नेताओं ने कई मामलों में अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने का आरोप लगाया. कुछ मामलों में कम मुआवजा मिलने की शिकायत भी सामने रखी गई.
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि कई रैयतों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है. दूसरी ओर, पूर्व पीटीपीएस की जमीन पीवीयूएनएल और जियाडा को हस्तांतरित की गई. डैम क्षेत्र के 12 गांवों की जमीन पर्यटन विभाग को दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए.
कांग्रेस प्रदेश महासचिव शांतनु मिश्रा ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं के दौरान विस्थापन और मुआवजे से जुड़े मामले लंबे समय से सामने आते रहे हैं. उन्होंने हेसला मामले में प्रभावित परिवारों के हित में कार्रवाई की मांग की.
रैयतों ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि जमीन के रिकॉर्ड और पुराने अधिग्रहण दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए. प्रभावित परिवारों को मुआवजा और न्याय दिलाने की भी मांग की गई.
मोर्चा नेताओं ने कहा कि सरकार ने मांगों पर पहल नहीं की तो आंदोलन तेज किया जाएगा. प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुखिया प्रतिनिधि वीरेंद्र झा, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मुन्ना पासवान, प्रवक्ता रमेश यादव, शंकर मुंडा और यशवंत सागर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

