Patna: बिहार सरकार भूमि विवाद निपटाने के लिए कवायद शुरू करने जा रही है. राज्य के डिप्टी सीएम और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि इसके लिए सरकार ने 26 जनवरी से जमीन नापी महाभियान चलाएगी, जो 31 मार्च तक चलेगी. इस अभियान के तहत विवादित और गैर-विवादित सहित सभी तरह की जमीन नापी की जाएगी. जिसकी रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज कराई जाएगी.
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि यह फैसला सात निश्चय पार्ट-3 के तहत जनता की सुविधा के लिए किया गया है. इस महाभियान के तहत गैर-विवादित जमीन की नापी 7 दिनों में होगी. जबकि, विवादित जमीन की नापी 11 दिनों में पूरी कर ली जाएगी. वहीं, भूमि मापी की रिपोर्ट 14 दिनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा. उन्होंने बताया कि, पहले 30 दिन में मापी की व्यवस्था थी.
ऑनलाइन करना होगा आवेदन
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल बताया कि अब ‘बिहार भूमि ई मापी पोर्टल’ पर भूमि मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा. विवादित और गैर-विवादित मामलों में मापी के बाद अमीन द्वारा रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा. अमीन को रिपोर्ट आवेदन की तिथि से 14वें दिन तक अपलोड करना होगा.
नई व्यवस्था से भूमि सीमांकन से जुड़े विवादों में कमी आएगी. साथ ही राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता आएगी. वहीं, आवेदन में आवेदक को यह स्पष्ट करना होगा कि भूमि गैर-विवादित या विवादित है. यदि भूमि विवादित पाई जाती है तो अंचलाधिकारी विवाद की प्रकृति को परिभाषित करेंगे.
तत्काल मापी में दुगना लगेगा शुल्क
नई व्यवस्था के तहत गैर-विवादित मामलों में आवेदन के साथ ही मापी शुल्क का देना होगा. जिसमें ग्रामीण क्षेत्र में यह शुल्क 500 रुपये प्रति खेसरा देना होगा. जबकि शहरी क्षेत्र में 1000 रुपये प्रति खेसरा देना होगा. वहीं, तत्काल मापी के लिए दोगुनी राशि देनी होगी.
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