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Latehar News : समस्याओं का निदान की मांग को लेकर कामता पंचायत समिति सदस्य का रात्रि पड़ाव

Latehar : जिले के चंदवा प्रखंड मुख्यालय से मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामता पंचायत में एक आदिम जनजाति (पीवीटीजी) बहुल गांव चटुआग है. बताया जाता है कि चटुआग ग्राम विकास से कोसो दूर है. ग्रामीणों को यहां सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है. पेयजल व सड़क का नितांत अभाव है. इन सब समस्याओं का डीएमएफटी फंड से निदान कराने की मांग को लेकर पांच जुलाई की रात चटुआग ग्राम में  रात्रि पड़ाव किया गया. यह रात्रि पड़ाव कामता पंचायत समिति सदस्यल अयूब खान ने किया.
 
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Latehar : जिले के चंदवा प्रखंड मुख्यालय से मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामता पंचायत में एक आदिम जनजाति (पीवीटीजी) बहुल गांव चटुआग है. बताया जाता है कि चटुआग ग्राम विकास से कोसो दूर है. ग्रामीणों को यहां सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है. पेयजल व सड़क का नितांत अभाव है. इन सब समस्याओं का डीएमएफटी फंड से निदान कराने की मांग को लेकर पांच जुलाई की रात चटुआग ग्राम में  रात्रि पड़ाव किया गया. यह रात्रि पड़ाव कामता पंचायत समिति सदस्य अयूब खान ने किया.

 

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इस दौरान उन्होंंने चटुआग स्कूल में ग्रामीणों के साथ रात गुजारी और उनक समस्याओं को जाना. श्री खान ने बताया कि भ्रमण के दौरान पता चला कि जेठनी देवी पति राजू कुमार परहैया का आवास जर्जर हालत में है. वह अपने भाई विजय परहैया के घर में अपने सात परिवारों के साथ पिछले कई वर्षों से रहते आ हैं.

 

खान ने बताया कि गांव में पेयजल की सुविधा नहीं रहने के कारण ग्रामीण चूआंड़ी का दूषित पानी पीने को बेबश हैं. एक जलमीनार है लेकिन वह काफी नहीं है. बिजली का कनेक्शमन सभी घरों तक नहीं पहुंच पाया है.

 

प्रखंड कार्यालय से मात्र पांच किलोमीटर दूर और पक्की सड़क से करीब आधे किलोमीटर पर स्थित कामता पंचायत के ग्राम चटुआग के उत्क्रमित प्रथमिक विद्यालय परहैया टोला चटुआग के स्कूल की सड़क हालत ठीक नहीं है. इस स्कूल में करीब 12 से अधिक बच्चे आदिम जनजाति के और 15 आदिवासी समुदाय के बच्चे पढ़ाई करते हैं. इस सड़क पर पैदल चलना भी काफी मुश्किल है. गांव में अच्छी सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती है.

 

कालीकरण सड़क तक ही एंबुलेंस जाती है, उसके बाद रोगी को खटिया- डोली के सहारे एंबुलेंस तक लाया जाता है. कई परिवारों को उज्जवला रसोई गैस, राशन कार्ड व पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. गांव में रोजगार नहीं रहने के कारण परहैया टोला के 80 प्रतिशत आदिम जनजाति परिवार दूसरे प्रदेश में पलायन करते हैं.

 

श्री खान ने गांव में शिविर लगा कर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग की. रात्रि पड़ाव में दसवा परहैया, राजकुमार परहैया, सुरेंद्र परहैया, विजय परहैया, सनीका मुंडा, बुधराम बारला, अंकित परहैया, गबरेल मुंडा, ललु परहैया, कुसूम परहैया, विजय भेंगरा, बीनोद परहैया, अजय परहैया, बंधु होरो, दिपेश टोपनो, अमीत भेंगरा, पौलूस टोपनो, राजकुमार भोगता व अन्य शामिल थे.


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