- लातेहार में 73 से अधिक थैलेसीमिया और सिकल सेल मरीज
- हर महीने ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत
- एकमात्र ब्लड बैंक होने से रक्त की कमी
- ब्लड की कमी होने से ट्रांसफ्यूजन में होती है परेशानी
Latehar : जिले में थैलेसीमिया और सिकल सेल के 73 से अधिक मरीज हैं, जिन्हें हर महीने ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है. लेकिन जिले के एकमात्र ब्लड बैंक में रक्त की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
ब्लड बैंक की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. धर्मशीला चौधरी ने बताया कि इन दिनों ब्लड बैंक रक्त की गंभीर कमी से जूझ रहा है. इसका सबसे अधिक असर थैलेसीमिया और सिकल सेल के मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें नियमित रूप से खून चढ़ाना जरूरी होता है. उन्होंने कहा कि कई बार मरीजों के परिजनों को समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता, जिससे उनकी चिंता बढ़ जाती है.
डॉ. चौधरी ने बताया कि रेडक्रॉस सोसाइटी और अस्पताल प्रबंधन की ओर से समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद जरूरत के अनुसार रक्त संग्रह नहीं हो पा रहा है. उन्होंने जिले के रक्तदाता समूहों, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों, बैंकों, इंडस्ट्री और कॉरपोरेट घरानों से आगे आकर नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करने की अपील की है.
उपायुक्त ने भी की रक्तदान करने की अपील
उपायुक्त सह रेडक्रोस सोसयटी के अध्यक्ष संदीप कुमार ने भी जिलावासियों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की है. उन्होंने कहा कि रक्तदान कर ही रक्त का संग्रह किया जा सकता है. मानव रक्त का कोई विकल्प नहीं है.
उन्होंने कहा कि लोगों में यह भ्रांति है कि रक्तदान करने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है. जबकि एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है. उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान अभियान से जुड़ने का आग्रह किया.
क्या है थैलेसेमिया और सिकल सेल
थैलेसीमिया : यह एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन या स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता. इसके कारण मरीज गंभीर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित हो जाता है. ऐसे मरीजों को जीवित रहने के लिए नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाने) की आवश्यकता होती है.
सिकल सेल : इस बीमारी में लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार की बजाय हंसिये या अर्धचंद्राकार हो जाती हैं. ये कठोर कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं में फंसकर रक्त प्रवाह को बाधित करती हैं, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंच पाती. इसके कारण मरीज को तेज दर्द, कमजोरी और हीमोग्लोबिन की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
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