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लातेहारः बेतला टाइगर रिजर्व से नौ शिकारी गिरफ्तार, 13 भाग निकले

पीटीआर के उप निदेशक प्रजेश जैन ने बताया कि 19 अगस्त को नावागढ़ निवासी सरफुदीन मियां को बारूद व गंधक बेचते गिरफ्तार किया गया था. सख्ती से पूछताछ करने पर उसने खुलासा किया कि वह भरठुआ बंदूक में इस्तेमाल के लिए इन सामग्रियों को  शिकारियों को बेचता है.
 

Latehar : लातेहार वन विभाग की टीम ने बेतला टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में सक्रिय शिकारी गिरोह का खुलासा किया है. टीम ने छापामारी कर शिकारी गिरोह के नौ सदस्योंे को गिरफ्तार किया है. 13 शिकारी भाग निकले. यह जानकारी पीटीआर के उप निदेशक प्रजेश जैन ने बुधवार को बेतला में आयोजित प्रेसवार्ता में दी. उन्होंने बताया कि 19 अगस्त को नावागढ़ निवासी सरफुदीन मियां को बारूद व गंधक बेचते गिरफ्तार किया गया था. सख्ती से पूछताछ करने पर उसने खुलासा किया कि वह भरठुआ बंदूक में इस्तेमाल के लिए इन सामग्रियों को  शिकारियों को बेचता है.

उसने गारू थाना क्षेत्र के कुई ग्राम निवासी तपेश्वर सिंह को बारूद देने की बात स्वीकार की. इसके बाद वन विभाग की टीम ने बुधवार को तड़के करीब तीन बजे कुई गांव में छापेमारी की, जिसमें आरोपी तपेश्वर सिंह को गिरफ्तार किया गया. उसके घर से एक भरठुआ बंदूक बरामद की गई. उसने कबूल किया कि वह एक गिरोह के साथ मिलकर पलामू टाइगर रिजर्व के जंगलों में वर्षों से शिकार कर रहा है.

10 वर्ष पहले बाघ का शिकार किया था

तपेश्वर सिंह ने स्वीककार किया कि  10 वर्ष पहले गारू के चंदवा चट्टान क्षेत्र में एक बाघ का शिकार किया गया था. तपेश्वीर सिंह की निशानदेही पर टीम ने छापामारी कर नौ शिकारियों को गिरफ्तार कर लातेहार जेल भेज दिया. गिरफ्तार शिकारियों में नावागढ़ निवासी सरफुदीन मियां, गारू के कुई निवासी तपेश्वर सिंह, रामसुंदर तुरी, झमन सिंह, कईल भुईयां, कारवाई ग्राम निवासी अजित सिंह, हरिचरण सिंह, जरुहार निवासी रमन सिंह व पारसनाथ सिंह शामिल है. उनके पास से आठ भरठुआ बंदूक, छह इंच का एक फरसा, 400 ग्राम बारूद, 14 ग्राम गंधक, एक  टाइगर ट्रैप (बाघ फंसाने का फंदा), 15 फिट का दो फंदा व जंगली जानवरों की हड्डी (टाफी) बरामद किया गया है.

छापेमारी के लिए बनी थीं दो टीमें

छापामारी के लिए दो टीमें बनाई गई थीं. गारू ईस्ट और छिपादोहर ईस्ट के नेतृत्व में गहन छापेमारी की गई. पलामू टाइगर रिजर्व साउथ के उपनिदेशक कुमार आशीष व पलामू टाइगर रिजर्व नॉर्थ के उपनिदेशक प्रजेश जेना के निर्देशन में अभियान को अंजाम दिया गया. उन्हों ने बताया कि शिकारियों का यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था. अब तक नौ  गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि 13 आरोपी फरार हैं. जंगलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. प्रेसवार्ता में उप निदेशक कुमार आशीष, उप निदेशक प्रजेश जेना, रेंजर उमेश दुबे व रेंजर अजय टोप्पो समेत कई अधिकारी मौजूद थे.

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