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विश्रामपुर में ग्रामीणों पर लाठीचार्ज मानवाधिकार का हनन: भारतीय आदिवासी महासभा

जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत बिश्रामपुर गांव में बीते 7 मार्च को ग्रामीणों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को अखिल भारतीय आदिवासी महासभा और स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग टीम ने वन अधिकार कानून 2006 का उल्लंघन, पुलिसिया बर्बरता और मानवाधिकार का हनन बताया है.
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Garhwa :  जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत बिश्रामपुर गांव में बीते 7 मार्च को ग्रामीणों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को अखिल भारतीय आदिवासी महासभा और स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग टीम ने वन अधिकार कानून 2006 का उल्लंघन, पुलिसिया बर्बरता और मानवाधिकार का हनन बताया है.

 

दल ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित ग्रामीणों, प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों से बातचीत की और घटना से जुड़े फोटो-वीडियो और समाचार रिपोर्टों का अध्ययन किया.

 

फैक्ट फाइंडिंग टीम के अनुसार, प्रशासन शहीद नीलांबर-पीतांबर उत्तर कोयल परियोजना (मंडल डैम) के लिए ग्रामीणों को उनकी इच्छा के विरुद्ध वनभूमि से विस्थापित करने का प्रयास कर रहा है.

 

दल ने बताया कि 7 मार्च को लगभग 11:30 बजे जिला प्रशासन के अधिकारी करीब 40 गाड़ियों के काफिले के साथ बिश्रामपुर पंचायत भवन पहुंचे और बंद कमरे में बैठक की. ग्रामीणों को बैठक में शामिल नहीं किया गया.

 

जब अधिकारी प्रस्तावित पुनर्वास स्थल की ओर जा रहे थे, तब ग्रामीणों ने केवल यह जानने के लिए रास्ता रोका कि वे किस उद्देश्य से आए हैं. टीम का कहना है कि मौके पर मौजूद ग्रामीण निहत्थे थे और उनमें अधिकतर महिलाएं थीं.

 

आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के धक्का-मुक्की करते हुए लाठीचार्ज कर दिया. इस दौरान महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं थीं. लाठीचार्ज में 14 ग्रामीण घायल हुए, जिनमें कई महिलाएं और एक 12 वर्षीय बच्चा भी शामिल है.

 

तीन लोगों को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका इलाज गढ़वा सदर अस्पताल में किया गया. फैक्ट फाइंडिंग टीम ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई वन अधिकार कानून 2006 की धारा 3(1) और धारा 4(5) के प्रावधानों का उल्लंघन है.

 

वन अधिकार कानून के अनुसार,  वन अधिकारों की मान्यता से पहले किसी भी वन निवासी को उसकी भूमि से बेदखल नहीं किया जा सकता.  टीम ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच, घायल ग्रामीणों को मुआवजा और ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार के पुनर्वास कार्य पर रोक लगाने की मांग की है. 


फैक्ट फाइंडिंग टीम में फिलिप कुजूर, सुनील मिंज, बिश्राम बाखला (20 सूत्री अध्यक्ष, बड़गढ़ प्रखंड), माणिकचंद कोरवा, दयाकिशोर मिंज (सदस्य, सामुदायिक वन प्रबंधन फेडरेशन), लखन उरांव (प्रखंड अध्यक्ष, रंका, अखिल भारतीय आदिवासी महासभा), रामलखन सिंह (ग्रामसभा सदस्य, करी गांव) और कविता सिंह खेरवार शामिल थीं.

 

 


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