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वकील मनोज टंडन सड़क दुर्घटना केस: SC ने झारखंड HC के अंतरिम आदेश पर लगाई रोक

Ranchi : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में झारखंड हाई कोर्ट के के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है. यह आदेश एसएलपी (क्रिमिनल) संख्या 3684/2026 में पारित किया गया, जो डब्ल्यूपीसीआर संख्या 4238/2026 में 19 फरवरी 2026 को झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दायर की गई थी. 

 

मामले में याचिकाकर्ता के रूप में झारखंड सरकार एवं अन्य तथा प्रतिवादी के रूप में मनोज टंडन व अन्य पक्षकार हैं. सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने 26 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया. अदालत ने नोटिस चार सप्ताह में जवाबी कार्रवाई योग्य (returnable within four weeks) किया है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक झारखंड हाईकोर्ट के 19 फरवरी 2026 के अंतरिम आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक (stay) रहेगी. इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में दायर छूट संबंधी अंतरिम आवेदनों (आईए) पर भी आदेश पारित किया. अब इस मामले में प्रतिवादियों को नोटिस का जवाब दाखिल करना होगा और चार सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई होगी.

 

दोनों एफआईआर पर जांच और कार्यवाही पर हाई कोर्ट ने लगाई थी रोक

बता दें कि 19 फरवरी को झारखंड हाईकोर्ट ने एक मामूली सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताते हुए दोनों एफआईआर की जांच पर रोक लगा दी थी.

 

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की कोर्ट ने निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता मनोज टंडन के खिलाफ कोई भी दबावपूर्ण या पीड़क कार्रवाई नहीं की जाएगी. याचिकाकर्ता मनोज टंडन ने डोरंडा थाने में दर्ज दो मामले की सीबीआई जांच करने का आग्रह किया था.

 

मामले में कोर्ट ने कहा था कि यदि एक ही घटना से जुड़े दो मामले हों, तो दोनों की जांच सामान्यतः एक ही जांच अधिकारी द्वारा होनी चाहिए. कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले के दोनों एफआईआर की आगे की जांच और कार्यवाही पर रोक रहेगी.

 

याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई coercive कदम नहीं उठाया जाएगा. SSP रांची स्थिति पर नजर रखेंगे और याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी और जांच में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है.


क्या है मामला

याचिकाकर्ता मनोज टंडन ने अदालत में बताया कि 17 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट आते समय उनकी कार हल्के रूप से एक बाइक से टकरा गई थी. इसके बाद पुलिस ने उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक थाना में बैठाए रखा और कार को कब्जे में ले लिया, जबकि अब तक विधिवत सीजर मेमो भी तैयार नहीं किया गया था.


मीडिया ट्रायल और सांप्रदायिक रंग देने का आरोप

याचिकाकर्ता के वकील ने हाई कोर्ट में कहा था कि पुलिस द्वारा इस छोटे से मामले में मीडिया ट्रायल कराया जा रहा है. साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा घर और थाना को घेरने की स्थिति उत्पन्न हुई.

 

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में यह भी आशंका जताई थी कि पुलिस उन्हें कभी भी हिरासत में ले सकती है, जबकि BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस देना आवश्यक है.

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