Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Dhanbad News: 9 हजार की नौकरी छोड़ शुरू की नर्सरी, अब कमा रहे लाखों

Dhanbad: जहां अधिकांश युवा सरकारी या निजी नौकरी को अपने करियर का लक्ष्य मानते हैं. वहीं धनबाद जिले के धोकरा निवासी अशोक मंडल ने सुरक्षित नौकरी छोड़कर स्वरोजगार का रास्ता चुना और आज अपनी मेहनत, लगन तथा दूरदर्शिता के बल पर एक सफल नर्सरी व्यवसायी के रूप में पहचान बना चुके हैं. उनकी नर्सरी न केवल धनबाद बल्कि झारखंड के कई जिलों में प्रसिद्ध हो चुकी है.

इसे भी पढ़ें: 

अशोक मंडल पहले बैंक मोड़ स्थित एसबीआई के जोनल कार्यालय में मैसेंजर के पद पर कार्यरत थे. निजी स्तर पर कार्यरत अशोक को प्रतिमाह करीब 9200 रुपये वेतन मिलता था. लगभग सात वर्षों तक नौकरी करने के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना व्यवसाय शुरू करने का साहसिक निर्णय लिया.

 

अशोक बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही खेती और पौधों से विशेष लगाव था. खेती-बाड़ी के दौरान उनके मन में कुछ अलग और स्वयं का व्यवसाय करने का विचार आया. बैंक में नौकरी के दौरान कृषि क्षेत्र से जुड़े एक अधिकारी ने उन्हें पौधों की खेती और नर्सरी प्रबंधन की बारीकियां सिखाईं. बीज तैयार करने, पौधों की देखभाल, मिट्टी की गुणवत्ता और नर्सरी संचालन की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का निर्णय लिया.


अशोक मंडल ने वर्ष 2019 में छोटे स्तर पर अपनी नर्सरी की शुरुआत की. प्रारंभिक दौर में उन्होंने लगभग 10 हजार पौधे तैयार किए. मेहनत और बेहतर प्रबंधन के कारण उन्हें पहले ही चरण में करीब डेढ़ लाख रुपये का लाभ हुआ.

 

इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यवसाय का विस्तार शुरू कर दिया. आज उनकी नर्सरी में डेढ़ लाख से अधिक पौधे मौजूद हैं. यहां फूलों, फलदार, औषधीय और सब्जियों के पौधों के अलावा बागवानी से जुड़ी कई प्रजातियां उपलब्ध हैं. नर्सरी में 200 से अधिक किस्मों के पौधे तैयार किए जाते हैं जिसकी वजह से यह क्षेत्र की प्रमुख नर्सरियों में शामिल हो गई है.

 

अशोक मंडल की नर्सरी की पहचान अब धनबाद तक सीमित नहीं है. धनबाद के अलावा रांची, जामताड़ा, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़, हजारीबाग और डाल्टनगंज समेत कई जिलों से लोग पौधे खरीदने और ऑर्डर देने यहां पहुंचते हैं. गुणवत्तापूर्ण पौधों और उचित कीमत के कारण ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है.

 

नर्सरी व्यवसाय के माध्यम से अशोक मंडल न केवल खुद आत्मनिर्भर बने हैं बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं. वर्तमान में नर्सरी में करीब 8 लोग नियमित रूप से कार्यरत हैं. वहीं सीजन के दौरान यह संख्या बढ़कर 12 से 15 लोगों तक पहुंच जाती है.

 

सफलता के बावजूद अशोक मंडल कुछ चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.उनका कहना है कि अब तक उन्हें किसी प्रकार की सरकारी सहायता या सब्सिडी नहीं मिल सकी है. इसके अलावा सिंचाई के लिए बिजली की समस्या भी बनी रहती है जिससे पौधों की देखभाल प्रभावित होती है.

 

अशोक मंडल की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि यदि व्यक्ति में मेहनत करने का जज्बा, सीखने की ललक और आत्मविश्वास हो तो सीमित संसाधनों के बावजूद स्वरोजगार के माध्यम से न केवल अपनी पहचान बनाई जा सकती है बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही