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झारखंड में भी बिहार-गुजरात की तरह पूर्ण शराबबंदी हो, जयराम ने सदन में रखी मांग

Ranchi :  झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में विधायक जयराम महतो ने विभिन्न विभागों के अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान राज्य के कई अहम मुद्दों को सदन में उठाया. उन्होंने पुलिस बहाली, अवैध खनन, शराबबंदी, ऊर्जा और पेयजल जैसी समस्याओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया.

 

जयराम महतो ने सदन में बिहार और गुजरात की तरह झारखंड में भी पूर्ण शराबबंदी लागू करने की मांग की. उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में 18 से 25 वर्ष के कई युवाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण शराब है. कहा कि उन्हें अपने वोट की चिंता नहीं है, बल्कि राज्य के युवाओं के भविष्य की चिंता है.

 

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तबादला-पोस्टिंग की व्यवस्था को पुलिस तंत्र की बड़ी समस्या बताया

जयराम महतो ने पुलिस विभाग को नई पेट्रोलिंग वाहन देने पर सरकार की सराहना की. वहीं पुलिसकर्मियों के लिए वर्दी, धुलाई, विशेष कर्तव्य, चिकित्सा और शिक्षा सहित 11 प्रकार के भत्तों की मांग की.

 

उन्होंने कहा कि राज्य में 23,645 पुलिस पद खाली हैं और इसी वित्तीय वर्ष में नई बहाली निकाली जानी चाहिए, ताकि लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं को रोजगार मिल सके. उन्होंने तबादला-पोस्टिंग की व्यवस्था को भी पुलिस तंत्र की बड़ी समस्या बताया.

 

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नागालैंड-मेघालय की तरह कोऑपरेटिव सोसाइटी के जरिये कोयला खनन कराने का सुझाव

खनन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि झारखंड देश को करीब 40 प्रतिशत खनिज देता है. लेकिन राज्य को सिर्फ 19 हजार करोड़ रुपये ही राजस्व आता है. जबकि ओडिशा को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिल रहा है.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि कोलांचल क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 600 करोड़ रुपये का अवैध कोयला कारोबार हो रहा है. उन्होंने सुझाव दिया कि नागालैंड और मेघालय की तरह कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से कोयला खनन कराया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिल सके.

 

अडानी प्रोजेक्ट व यूरेनियम खनन के प्रभाव का मुद्दा उठाया

ऊर्जा विभाग पर चर्चा करते हुए डुमरी विधायक ने गोड्डा में चल रहे अडानी प्रोजेक्ट पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस परियोजना में कोयला ऑस्ट्रेलिया से आता है और बिजली बांग्लादेश भेजी जाती है, जबकि जमीन झारखंड की ली गई है. 

 

उन्होंने जादूगोड़ा क्षेत्र में यूरेनियम खनन के प्रभाव का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि वहां कई स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं और कई महिलाएं मां नहीं बन पा रही हैं. उन्होंने प्रभावित गांवों के विस्थापन और बेहतर पुनर्वास की मांग की.

 

 

 

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