- दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी को बड़ी राहत दी
- महाधिवक्ता ने घोटाले को राष्ट्रीय शर्म का विषय करार दिया.
- स मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी.
New Delhi : दिल्ली हाई कोर्ट ने आज सोमवार को दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई की. इससे पूर्व केंद्र सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता तुषार मेहता ने हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह याचिका स्वीकार कर ले, क्योंकि यह देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है.
VIDEO | Delhi: BJP leader Bansuri Swaraj says, “We welcome this order. It has once again brought a ray of hope that the people of Delhi will receive justice in the liquor scam.”
— Press Trust of India (@PTI_News) March 9, 2026
The Delhi High Court on Monday sought the stand of former Delhi chief minister Arvind Kejriwal,… pic.twitter.com/5N6t9cRAGt
महाधिवक्ता ने इसे राष्ट्रीय शर्म का विषय करार दिया. कहा कि इस घोटाले की साइंटिफिक तरीके से जांच की गयी है, साजिश के हर एक पहलू को स्थापित किया गया है.
हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए सुनवाई की. तुषार मेहता की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी को बड़ी राहत दी.
हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को बरी करते समय निचली अदालत द्वारा सीबीआई पर की गयी टिप्पणियों पर रोक लगा दी.
न्यायालय ने केजरीवाल सहित सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने आरोपियों को बरी किये जाने के निचली अदालत के फैसले के विरोध में दायर सीबीआई की याचिका पर सुनवाई की
दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम फैसला लेते हुए निचली अदालत को आदेश दिया कि याचिका पर कोई फैसला होने तक वह शराब नीति के संबंध में पीएमएलए के तहत जारी मामले पर आगे सुनवाई नहीं करे.
इस क्रम में कोर्ट ने केजरीवाल सहित सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया. बता दें कि इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी.
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है कि दिल्ली के लोगों को शराब घोटाले में न्याय मिलेगा.
स्वराज ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया और 21 अन्य से शराब नीति मामले में निचली अदालत द्वारा आरोप मुक्त किये जाने को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर उनसे जवाब मांगा है.
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