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शराब घोटाला में बेल की शर्त :  विनय सिंह को बिना अनुमति विदेश जाने पर कोर्ट की पाबंदी

Ranchi : कोर्ट ने नेक्सजेन के मालिक विनय कुमार को सशर्त अग्रिम जमानत दी है. इसमें बिना अनुमति विदेश जाने पर पाबंदी के अलावा मोबाइल नंबर और पता नहीं बदलने की शर्त भी शामिल है. न्यायालय ने एसीबी द्वारा जारी शराब घोटाले में सहयोग करने और सबूत से छेड़छाड़ नहीं करने की शर्त भी लगायी है.

 

शराब घोटाले की जांच के दौरान एसीबी ने 26 मई को नोटिस जारी कर 30 मई को पूछताछ के लिए एसीबी कार्यालय में हाजिर होने का निर्देश दिया था. इसके बाद 28 मई को एसीबी के डीएसपी संतोष कुमार ने फोन कर नोटिस मिलने या नहीं मिलने के सिलसिले में पूछताछ की. एसीबी द्वारा 28 मई को विनय सिंह के वाट्सएप पर दस्तावेज की मांग से संबंधित एक सूची भेजी गयी. साथ ही दस्तावेज के साथ 30 मई को हाजिर होने का निर्देश दिया गया.

 

इन परिस्थितियों के मद्देनजर गिरफ्तारी की आशंका होने पर विनय सिंह की ओर से एसीबी के विशेष न्यायाधीश की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गयी. इसमें यह दलील दी कि उनका शराब के कारोबार से कोई संबंध नहीं है. वह गाड़ियों के व्यापारी है. एसीबी द्वारा शराब घोटाले में दर्ज की गयी प्राथमिकी मे वह नामजद अभियुक्त भी नहीं है.

 

 

एसीबी ने मामले की प्रारंभिक जांच के दौरान उनसे कभी पूछताछ नहीं की. एसीबी की प्राथमिकी जिस अपराध का उल्लेख किया गया है उस अपराध से याचिकादाता का कोई लेना देना नहीं है. याचिकादाता कानून का अनुपालन करने वाला व्यक्ति है. वह जांच में मदद भी करना चाहता है. उसे गिरफ्तारी का डर है. इसलिए उसे अग्रिम जमानत दी जाये.

 

एसीबी की ओर से याचिका का विरोध करते हुए यह कहा गया कि याचिकादाता प्राथमिकी में नामजद अभियुक्त नहीं है. लेकिन मामले की जांच के दौरान उसकी भूमिका पायी गयी है. वह जान बूझ कर पूछताछ के लिए एसीबी के सामने हाजिर नहीं हो रहा है. उसके खिलाफ सीधा और गंभीर आरोप है. इसलिए उसे अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए.

 

न्यायालय ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद बिनय सिंह को अग्रिम जमानत देने का फैसला किया. अदालत ने अपने फैसले में लिखा कि याचिकादाता नामजद अभियुक्त नहीं है. पीई की जांच के दौरान भी उसकी कोई भूमिका नहीं पायी गयी. एसीबी द्वारा दर्ज उत्पाद विभाग मे जालसाजी, साजिश और सरकार को नुकसान पहुंचा कर गलत तरीके से पैसा कमाने से संबंधित है. इस मामले की जांच चल रही है. अब तक याचिकादाता के खिलाफ कोई सीधा ओर ठोस आरोप और सबूत नहीं पाया गया है. इन तथ्यों को देखते हुए न्यायालय ने याचिकादाता को सशर्त अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया.

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