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धर्मपुर के शिव मंदिर परिसर में भगवान चित्रगुप्त पूजा की गई

जिला मुख्यालय के धर्मपुर स्थित शिव मंदिर परिसर में गुरुवार को भगवान चित्रगुप्त की पूजा की गई. इस अवसर पर कायस्थों ने अपने इष्ट देव भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की सामूहिक रूप से वैदिक मंत्रोचारण से पूजा की.
 

Latehar :  जिला मुख्यालय के धर्मपुर स्थित शिव मंदिर परिसर में गुरुवार को भगवान चित्रगुप्त की पूजा की गई. इस अवसर पर कायस्थों ने अपने इष्ट देव भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की सामूहिक रूप से वैदिक मंत्रोचारण से पूजा की.

 

पूजा के महाप्रसाद का वितरण किया गया. अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के जिला अध्यक्ष विवेक सिन्हा ने बताया कि श्री चित्रगुप्त महाराज संसार के सभी चीजों का लेखा-जोखा रखते हैं. वैसे कलम से काम करने वाले सभी लोगों को श्री चित्रगुप्त भगवान की पूजा करनी चाहिए. कायस्थ  चित्रगुप्त भगवान के वंशज हैं. 

 

पौराणिक आख्यानों के अनुसार सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा जी चिंतित  हो गए चिंता का कारण था सकल सृष्टि की देखरेख एवं लेखा-जोखा रखना. कोई उपाय ना सूझ तो वह 12000 वर्ष की अखंड समाधि में लीन हो गए. कालांतर में जब उनके नेत्र खुले तो सामने सांवले वर्ण का मुस्कुराता सुदर्शन बालक खड़ा था. उसके हाथ में कलम और  दवात थी. 

 

बियाबान में इस तेजस्वी बालक को देख भगवान ने परिचय पूछा तो बालक ने कहा कि भगवान मैं तो आपकी ही काया से उत्पन्न हुआ हूं. मेरा ना कोई वर्ण है ना कोई परिचय. ब्रह्मा जी ने कहा कि मेरी काया से उत्पन्न हो अतएव तुम कायस्थ हुए.

 

समस्त जीवों के कर्म का लेखा-जोखा रखना ही तुम्हारा दायित्व है. जब यौवन की दहलीज पर पहुंचे तो इरावती एवं शोभावती नामक कन्याओं से विवाह हुआ. प्रथम पत्नी से चार एवं द्वितीय से आठ पुत्र उत्पन्न हुए. इन पुत्रों का नामकरण इनके शासित प्रदेश के आधार पर क्रमशः श्रीवास्तव, निगम, करण, कुलश्रेष्ठ, माथुर, सक्सेना, अस्थाना एवं वाल्मीकि आदि किया गया. आज भी कायस्थ वंश की उपजातियां इन्हीं नाम से अपनी पहचान कायम रखे हैं.

 

पुराणों के अनुसार आदि देव भगवान चित्रगुप्त धर्मराज के दरबार में समस्त प्राणियों के कर्मों के आधार पर स्वर्ग एवं नरक का आवंटन करते हैं.  वर्तमान काल में उनके वंशज आज भी धर्म राजनीति प्रशासन विज्ञान समाज सेवा दर्शन राष्ट्र सुरक्षा आदि क्षेत्रों में सक्रिय दायित्व संभाले हैं. पूजा में मुख्य रूप से मिथिलेश कुमार सिन्हा, लवलेश कुमार सिन्हा पंकज कुमार सिन्हा, संजय सिन्हा, धनेश सिन्हा, उपेंद्र कुमार सिन्हा, नीरज सिन्हा, अरविंद कुमार सिन्हा, राजेंद्र कुमार सिन्हा, योगेंद्र प्रसाद, संजीव कुमार सिन्हा, उदय सिन्हा, रितेश सिन्हा और अनिकेत सिन्हा उपस्थित थे

 

 

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