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चैत्र नवरात्र पर फूलों से सजा रजरप्पा का मां छिन्नमस्तिका मंदिर

Ramgarh : छिन्मस्तिका मंदिर न्यास समिति द्वारा इस बार मां के दरबार को आकर्षक तरीके से सजाया गया है. दर्जनों कारीगरों ने एक सप्ताह तक दिन रात मेहनत कर मंदिर को खूबसूरत ढंग से सजाया है. नवरात्र को लेकर सिद्धपीठ रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर को फूलों से इतना खूबसूरत तरीके से सजाया गया है कि इसकी खूबसूरती बढ़ गई है. लोग मंदिर की खूबसूरती देख निहाल हो रहे हैं. 

 

मंदिर आने वाले श्रद्धालु अपने कैमरे में इस खूबसूरत दृश्य को कैद करते हुए देखे जा रहे है. दरअसल विभिन्न प्रकार के फूलों से मंदिर की भव्य सजावट के बाद मंदिर दुल्हन की तरह सजा हुआ है और रात में मंदिर दुधिया रोशनी से जगमगा रहा है. इसके कारण अब मंदिर में श्रद्धालुओं का धीरे-धीरे आना और सेल्फी लेना शुरू हो गया है.

 

कोलकाता से आए दो दर्जन से भी अधिक कारीगरों ने एक सप्ताह के अंदर ही लगातार दिन रात मेहनत कर मंदिर को खूबसूरत ढंग से सजाया है. मंदिर की सजावट होने के बाद से यहां भक्तों का आने का सिलसिला हर दिन बढ़ता ही जा रहा है. फूलों से सजा मंदिर को देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और सजावट का लुत्फ उठाते हुए सेल्फी ले रहे हैं.

 

मंदिर की भव्य सजावट लोगों को इस कदर आकर्षित कर रही है कि आसपास क्षेत्र के अलावा दूरदराज से यहां काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं और श्रद्धालु मंदिर की भव्य सजावट के साथ फोटो व सेल्फी लेने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं. 

 

नवरात्र के छठे दिन भक्तों ने किया माता कात्ययानी का आह्वान

वासंतिक नवरात्र के छठे दिन मंगलवार को रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर में साधकों ने माता कात्ययानी का आह्वान किया. इसके अलावे मंदिर के दूसरे छोर में भैरवी नदी के तट पर स्थित लुगू बाबा आश्रम में नवरात्र के मौके पर विशेष अनुष्ठान जारी रहा.

 

यहां आश्राचार्य रामशरण गिरी उर्फ गिरी बाबा के नेतृत्व में प्रतिदिन हवन, पूजन सहित कई प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान किये जा रहे हैं. नवरात्र के छठे दिन यहां भक्तों ने माता के छठे स्वरूप कात्यायनी की पूजा-अर्चना पूरे भक्तिभाव से की.

 

आज होगी माता कालरात्रि की पूजा 

छिन्नमस्तिका मंदिर के पुजारी शुभाशीष पंडा ने बताया कि नवरात्र के सातवें दिन बुधवार को यहां मां दुर्गा के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि की पूजा की जाएगी. उन्होंने बताया कि मां दुर्गा का सातवां अवतार, कालरात्रि के रूप में जाना जाता है. इनका रंग घने अंधकार की तरह काला है, इसलिए इन्हें कालरात्रि कहा जाता है.

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